Antarvasna Hindi Sex Stories मकड़जाल 11

मुन्ना~: मैं दावे से कह सकता हूँ सर….वो लोग इस दुनिया में नहीं है….सबका मर्डर हो चुका है…?
दोष~: खुल कर बताओ.
मुन्ना ने जितना पता लगाया था सब दोष को बता दिया.
दोष~: ह्म्‍म्म्मम……तो फिर आगे क्या करोगे…?
मुन्ना~: सारे फ़साद की झड़ वो सबूत है…जिसके लिए इतना बड़ा कांड हुआ….आख़िर क्या था उस सबूत में….यही जाने की कोशिश कर रहा हूँ….इस केस में बॉन्ड की भी मदद ले रहा हूँ…!
दोष~: बॉन्ड को मेरा थेन्कस कहना.
मुन्ना~; इसे सर ..कह दूँगा.
दोष~: सिंग….ये मामला बड़ा नाज़ुक है….इसे ज़रा केयरफुल हैंडिल करना…..एक गलती का ख़ामियाजा महँगा पड़ सकता है…
मुन्ना~: मैं जनता हूँ सर…पर एक बात में दावे से कह सकता हूँ…
दोष~: क्या…?
मुन्ना~: ये केस पहली नज़र में जो नज़र आता है है इतना सीधा है नहीं…
दोष~: फिर….?
मुन्ना~: सर कोई गहरा पहलू है जो अब तक छिपा है….एक धमाकेदार पहलू…जिसके खुलते ही सब बदल जाएगा…
दोष~: तुम्हें ऐसा क्यों लगा…?
मुन्ना~: आप ही सोचिए सर….क्या उनका कत्ल करना जरूरी था…जबकि सारा पावर जज के हाथ में था….पता चला है की क्षसे दबा दिया था….केस खत्म ही होने वाला था की तभी ये सबूत प्रकट हुआ….
आप ही सोचिए….ये सबूत क्या था…..एक वीडियो फुटेज….पक्का तो नहीं कह सकता हूँ सर….पर पूछताच्छ में भी यही पता चला है….
दोष~: कहते रहो सिंग….?
मुन्ना~: मना सर की संयोग से सबूत मिस्टर. ठाकुर के हाथ लग गया……क्या उस सबूत के लिए सबको गायब करके मारना जरूर था…..चलो मना जरूरी था….तो अगर देखा जाए तो इस केस से जुड़ा हर आदमी सजा पा चुका है….यहाँ तक की जो इंस्पेक्टर. मनिराम इस केस की पड़ताल कर रहा था…वो भी सजा पा चुका है….
इतना कहकर मुन्ना ने एक लंबी साँस भारी…..फिर बोला.
मुन्ना~: फिर ये मामला इतना टूल क्यों पदक रहा है…क्यों सब कुच्छ अब तक साफ नहीं हुआ है….क्यों वो लड़का हर केस से जुड़ा है….क्यों वो देव ना होते हुए भी खुद को देव कह रहा है….आख़िर क्या है जो बाकी है…चुत रहा है….
दोष~: क्या…?
मुन्ना~: अभी भी एक पॉवेरफ़ुल्ल अपराधी है जो इस केस का मुख्य आरोपी है…..जिसे देव खुद नहीं…..कानून सजा दिलाना चाहता है…वरना अब तक वो खुद सजा दे चुका होता….ऐसा नहीं है की वो उस तक. नहीं पहुँच सकता है….पहुँच सकता है….मगर पहुँचना नहीं बेनक़ाब करना चाहता है….समाज के सामने सारी कहानी लाना चाहता है.
दोष~: वेल्लडोने सिंग….सही जा रहे हो…जल्द ही उसका पता लगाओ.

मुन्ना~: इसे सर…!
दोष~: एक बात कहने से खुद को रोक नहीं पा रहा हूँ…
मुन्ना~: वो क्या सर….?
दोष~: मना पड़ेगा…कमाल का लड़का है ये देव ठाकुर….सबको अपनी उंगलियों पे नाचा रहा है….मजे की बात है सब धुरंधर जानते है की ये सब वो कर रहा है….पर फिर सब वो करने पर मजबूर है जैसा वो चाहता है….क्या मकड़जाल बुना है…..वो…वो…!
मुन्ना~: हाँ सर….उसने खेल ही कुच्छ इस तरह खेला है सर…..अगर जज क्षसे की सच्चाई तक पहुँचना है तो पहले ठाकुर केस हाल करना पड़ेगा……वैसे भी सर एक साक्ष् और है जिसने भी देव की खुले दिल से प्रसंशा की है…आपकी ही तरह सर..
दोष~: और वो है बॉन्ड…है ना..?
मुन्ना~: हाँ सर.
दोष~: ओके…सिंग….इस केस में चाहे कितनी भी पॉवेरफ़ुल्ल आदमी शामिल हो….तुम्हें किसी दबाव में आने की जरूरत नहीं है….सीधा ऊपर से आदेश आया है…ये पावर दिया है की कोई भी हमारे काम में दखल अंदाज़ी नहीं कर सकता है….अगर करता है…उसे गिरफ्तार कर सकते हो…चाहे वो सी.में. ही क्यों ना हो….हमें सीधा पे.में.ऑफिस रिपोर्ट करना है….जाओ और इस मामले को जल्द से जल्द सुलझाओ…..ये हमारे और पूरे डिपार्टमेंट की इज्जत का सवाल है….
ओके सर….मुन्ना ने लिखित आदेश लेकर अपनी जेब में डाला….सलाम ठोका और बाहर निकल आया.

तीनों धुरंधर एक ही शहर में थे….बॉन्ड…मुन्ना….और प्रिया….उनके अलावा सारा पुलिस और न्याय विभाग……सारी क़ानूनी सँस्थाए…..कितनी अजीब बात थी…..सबको एक ही केस पे लगाया गया…..और लगाने वाला तजा देव….या कोई और ….क्या देव सिर्फ़ एक योढ़ा था…..इस खेल का असली खिलाड़ी कोई और था….आख़िर क्या होने वाला था आगे…तीनों धुरंधर और एक देव….जब ऐसे मास्टरमाइंड थे तो धमाका,निश्चित था……कोई बड़ा और हैरतअंगेज धमाका….!!!!!!!!!!

सुबह का सुहाना मोसां था….. . . चल रही थी….अभी सुबह के 7 ही बजे थे…..
देव आराम से अपने रूम में सो रहा था…..तभी बेल ……इस . बेल ने देव की नींद में . डाला….सामने . . पर नज़र डाली और . हुए खड़ा हुआ ~” . चैन से सोने ही नहीं देते….!
दरवाजे पर पहुँचा…दरवाजा खोला…सामने प्रिया खड़ी थी….चेहरे पे . लिए…..बोली ~: हेलो मिस्टर. देव…कैसे हो ?
देव~: बहुत अच्छे प्रिया ग….प्लीज़ . इन.
प्रिया अंदर आ गयी….
दोनों कुर्सियो पर बैठ गये.
प्रिया~: लगता है आपकी की नींद . कर दी मैंने….?
देव~: कोई बात नहीं प्रिया ग….आपने मेरे लिए इतना किया है….मुझे आपका . . करना है….थेन्कस.
प्रिया~: क्या सचमुच…?
देव~: जी हाँ…
प्रिया~: अगर मैं ऐसा है तो मेरे कुच्छ सवालों के जवाब …..?
देव~: पूछिए…?
प्रिया~: अगर आपके परिवार के साथ इतना बुरा हुआ था तो आपने कानून की शरण क्यों नहीं ली….खुद ही उन लोगों को सजा क्यों दी….
देव~: मैंने किसी को कोई सजा नहीं दी……सब आपस में ही . …..मुझे सिर्फ़ . की कोशिश थी….रही बात कानून की तो ….वो आज तक गायब लोगों का पता तक नहीं लगा पाया…मुक्ति तक को इंसाफ नहीं . पाया….क्या मुझे फिर भी उस पर . करना चाहिए….!
प्रिया खामोश रही….
देव~: आप . ……
जी…
. …..मैं . जा रहा हूँ…!
……!
देव . में चला गया….प्रिया की नज़रे . . . लगी….कुच्छ . नहीं . तो वो फिर सोचने लगी….तभी देव . के दो . . में लेकर आया…एक . को दिया और . अपने . से लगा लिया.
प्रिया~: देव ….इसका मतलब आपको कानून पर भरोसा नहीं….!
देव~: है…पर अगर कोई गहरी नींद . इस कानून को . दे तो….?
प्रिया~: जिस तरह आपने . है….
देव~: मतलब…?
प्रिया~: मेरे …..मेरा . करके…..
देव~: नहीं प्रिया ग….जो कुच्छ भी किया है आपने अपनी मर्जी से किया है….मैंने कोई . नहीं किया…
प्रिया~: किया है मिस्टर. देव….
देव~: वो कैसे…?
प्रिया~: आप चाहते तो खुद सब बता सकते थे….आपने . मनिराम का नाम लिया….आप जानते थे मनिराम कभी . नहीं …..उसकी बातों से मुझे . होगा….और मैं खुद भी खुद . में जूट …..!
देव~: वो प्रिया ग….क्या बात है….अगर ऐसा था तो फिर आपने ये खोज बंद क्यों नहीं की…
प्रिया~: ये भी आप अच्छे से जानते थे…की मैं अपने अंकल और भाई की मौत का सच जाने के लिए किसी भी केस में घुस सकती हूँ…
देव~: फिर आप . पर क्यों . लगा रही है…..आप . की मौत कारण ढूँढ रही थी..
प्रिया~: क्यों की जो भी इस राज़ को जनता था वो दुनिया छोड चुका है….बस एक मनिराम और आप है . . नहीं खोला….मनिराम का तो समझ में आता है….फिलहाल का केस जो है….ये उससे काफी बड़ा मामला था….मनिराम के लिए चुप . . था..
पर आप चुप क्यों रहे…?
देव~: . इस सवाल का जवाब दे देता हूँ….अगर मैं आपसे ये कहता की आपका बाप एक . जज है….वो . के लिए . . है….आपका भाई एक . है…क्या आप . नहीं ना…..इसलिए मैंने कुछ नहीं बताया…सिर्फ़ . दिखाया था…… सब कुछ आप पता . और दुनिया को दिखाए…!
प्रिया~: अगर मैं सब कुच्छ जानकार चुप रहती तो… ?
देव~: नहीं प्रिया ग…आप एक . रिपोर्टर है…ऐसा नहीं करती….एक . है “कमाल . . में ही . है….!
प्रिया को अपनी . सुनकर अच्छा लगा….!
प्रिया~: मगर आपको . क्या हुआ…मैं तो जान चुकी हूँ की मैं जिनकी पैरवी के लिए . थी…वो गुनहगार थे….मेरा, काम . सा हो गया….सिर्फ़ जानना बाकी है की ऐसा क्यों हुआ….वो भी बहुत जल्द सामने आ जाएगा….वैसे सही . में दूसरे . से देखा जाए तो आपने मेरी काफी मदद की….जिससे मैं सच तक पहुँच पाई.
देव मुस्कराया…!
प्रिया~: पर आपका क्या . हुआ…सारे गुनहगार सजा पा चुके है फिर आपने क्यों किया…?
देव~: ये राज़ भी बहुत जल्द खुल जाएगा….बस थोड़ा इंतजार कीजिए…..जिस कानून ने इस मामले को . था….वही कानून इस मामले को खुद …..और अपनी . . के सामने . करेगा.
प्रिया ने और भी काफी कुच्छ …पूछा देव ने कुच्छ बातों को …कुच्छ का जवाब दिया….पर आगे क्या होने वाला था और क्यों कुच्छ भी पता नहीं चला….आख़िरकार प्रिया ने विदा ली और वापस मुंबई लौट गयी……अपने आर्तिकल से . . का असर . और न्यूज . करने….वो . थी आगे का काम फिर किसी धमाके के साथ होगा…तब फिर लौट …..तब तक नेवस्चाननेल के लिए आर्तिकल . . था उसको…..!!!!!!

बॉन्ड जब से देव के पास से आया था तब से बाए एक ही काम में जूता था…लेपटॉप में इस तरह डूबा था की जैसे सबकुछ इसमें ही था….इतना खो गया की उसे ना ब्रेकफास्ट का होश था ना ही . का…..
वो अलग अलग साइट खोलता….कुच्छ ना कुच्छ . और फिर नयी . पे यही . …..
जो . उसे पसंद आती….उसका . निकल …..आख़िरकार उसने तब लेपटॉप छोडा जब मॉब. की . ….
बॉन्ड सुबह से होटल के रूम में . था….. शायद कही से . किया था….
बॉन्ड ने लंबी साँस ली और जाकर दरवाजा खोला….सामने मुन्ना खड़ा था…मुन्ना मुस्कराया.
बॉन्ड~: क्या बीवी की तरह . कर रहा है प्यारे…..किसी दूसरी . के साथ . वाला नहीं हूँ.
मुन्ना मुस्कुराता रहा…बॉन्ड और मुन्ना अंदर आ गया और दरवाजा बंद करके . पर बैठ गये.
मुन्ना ने लेपटॉप और . देखा तो बोला~; लगता है मैंने . किया है….?
बॉन्ड~: ये सब जाने दे प्यारे…ये बता की तुम यहाँ क्या,कर रहा है….आना तो तुझे था पर इतनी …..क्या बात है मेरे ….?
मुन्ना ने सारी बात कही….आने की वजह बताई….!
बॉन्ड~: सही किया प्यारे….वैसे भी वहाँ कुच्छ नहीं . वाला था…
मुन्ना~: क्या मतलब…?
बॉन्ड चुप रहा,.
मुन्ना~: अब बता भी दे प्यारे…क्यों . बढ़ा रहा है…
बॉन्ड ने बताया…मुन्ना उछल पड़ा…उसकी आंखें . पड़ी….मानो कोई . सा चल गया हो….मुन्ना कुच्छ देर उसी हाल में रहा.
बॉन्ड~: होश में आ प्यारे…वरना कोई . घुस जाएगी…. बंद कर….प्यारे.
मुन्ना~: कमाल कर दिया है बॉन्ड तुमने…!
बॉन्ड~: ये कमाल भी उस नकली देव प्यारे का है….उसने जानबूझकर मुझे छल्लंगे किया….. थोड़ी ही देर में मुझे काफी हद तक समझ गया….. बड़ा पहुँचा हुआ . निकला.
मुन्ना~: हाँ…यार. सही कह रहा है…मेरे 10 साल,की . में ये पहला आदमी है जो इतना . है….कही हाथ . ही नहीं दे रहा है.
मुन्ना~: अगर तूने जो बताया सच है तो आख़िर ये इतनी . से कैसे कर गया….और क्यों ?
बॉन्ड~: तुम इस कहानी की मैं किरदार को . रहे हो प्यारे…?
मुन्ना~: मैं किरदार….?
बॉन्ड~: हाँ मेरे . ….
मुन्ना~: कौन..?
बॉन्ड~: ज़रा दिमाग को . दो प्यारे….समझ ….!
मुन्ना सोचने लगा और अचानक चुटकी . . बोला~: मुक्ति ठाकुर….!
बॉन्ड~: बिलकुल सही पकड़ा प्यारे…मुक्ति ठाकुर….ये . सचमुच कई लोगों की जान थी…!
मुन्ना~: यार इस पहलू पर . पहले नहीं सोचा ..वरना अब तक सब साफ हो चुका होता.
बॉन्ड~: मगर एक चेहरा फिर भी . रहता….जो, इस जुर्म का खिलाड़ी था.
मुन्ना~: ..
बॉन्ड~: प्यारे…मैंने . जो कहा..किया..?
मुन्ना~: हाँ.
मुन्ना~: हाँ यार.
बॉन्ड~: क्या पता चला प्यारे.
मुन्ना~: जिस वक्त ठाकुर परिवार गायब हुआ….उस वक्त पूरे महीने 3 लोग लापता हुए और 2 हत्या….जिनमें 2 बच्चे थे जिनका किडनॅप फिरौती के लिए किया गया था…जिन्हें छुड़ा लिया गया….एक रिपोर्टर था जो आज तक लापता है….

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *