Antarvasna Hindi Sex Stories मकड़जाल 10

बॉन्ड~: अच्छा प्यारे…एक बात बताओ..हालाँकि मैं जनता हूँ की सारे खेल सूत्रधार तुम नहीं कोई और भी है…..मगर ?
देव~: मगर,,,?
बॉन्ड~: फिलहाल सिर्फ़ इतना बता दो की तुमने जज से ऐसा क्या कहा की उसने पहले छग्गा को मारा फिर खुद आत्म हत्या कर ली….?
देव~: मुझे क्या पता…?
बॉन्ड~: मुझे पता है…
देव~: फिर बताओ ना…
बॉन्ड~: जरूर बताएँगे प्यारे…अपना काम भी तो साला यही है…पर पहले मेरे सवालों के जवाब तो मिले.
देव~: अब क्या बाकी रहा….
बॉन्ड~: चलो शुरू से समझता हूँ….रोहित गुप्ता और उसके दोस्त ने मुक्ति का रेप किया……उस रेप में एक तीसरा और भी थी….पोस्टमारतें रिपोर्ट का यही कहना था…ठीक..?
देव चुप रहा.
बॉन्ड~: फिर जब भी.में.ठाकुर ने कानून की मदद ली…वो केस हारने ही वाले थे…तभी एक चमत्कार हुआ…ठाकुर साहेब को सबूत मिला…..नतीज़न उन लोगों ने पूरे परिवार का किडनॅप किया…..और उन्हें मर डाला….देव को चूँकि ठाकुर साहेब ने समझा बुझा कर, देव को वापस भेज दिया…देव वापस लौटता , उससे ही पहले ये सारा कांड हो गया…….मैं ठीक कह रहा हूँ ना…?
देव चुप रहा.
बॉन्ड~: साँप क्यों सूंघ गया प्यारे….कुच्छ तो कहो….आपकी आवाज़ कानों में रस घोलती है..
देव ~: जी..सच है.
बॉन्ड~: मजा आ गया प्यारे…मना पड़ेगा ..कमाल का दिमाग दिया है ऊपर वाले ने उसे…जिसने ये सारा खेल खेला है…पर ?
देव~: पर क्या ?
बॉन्ड~: ये तो थी इंटर्वल तक की कहानी…जब शुरू होती है देव के इंतक़ाम की कहानी….
देव को मना पड़ा..बॉन्ड का एक एक शब्द सच था….सारी कहानी ऐसे सुना रहा था जैसे आंखों देखा हाल सुना रहा हो…पर देव खामोश रहा.
बॉन्ड~: अब यहाँ एक सवाल उठता है…की अगर ठाकुर परिवार गायब होने की कोई जरूरत नहीं थी….जब उन्हें सबूत मिल गया था…
दूसरी बात ..अगर दुश्मनों ने उस सबूत के लिए ठाकुर साहेब का किडनॅप किया था…अगर वो सबूत दुश्मनों को मिल गया था तो पूरे परिवार को मरने की कोई जरूरत ही नहीं थी…इसका मतलब उन्हें वो सबूत नहीं मिला…ईयसलीए एक एक कर सबको मर दिया और शायद कही दफ़ना दिया…या जला दिया हो..
तीसरी बात…..देव ने अपनी और अपने परिवार की सारी आइडी लेकर खुद गायब क्यों हो गया…..अगर तुम देव हो तो जवाब दो….?
देव~: नहीं मिस्टर. बॉन्ड…ऐसा कुच्छ नहीं हुआ…सब मान घाड़ंत बातें है….!
बॉन्ड~: कोई बात नहीं प्यारे…मैं बता देता हूँ…
देव~: जरूर क्यों नहीं…
बॉन्ड~: तो सुनो प्यारे….देव ने पूरे घर को उसी सबूत के लिए खोजा…..वो सबूत उसके हाथ भी लग गया……सबूत देखते ही उसके अंदर का जादूगर जगह उठा……उसने सब की आइडी गायब की और रफूचक्कर हो गया और ये सारा खेल खेला….सही कह रहा हूँ ना…मिस्टर. नकली देव ?
देव~: अच्छी कहानी है बॉन्ड…..तुम्हें फिल्मों के लिए ट्राइ करना चाहिए…एक सुपरहिट फिल्म बन सकती है.
बॉन्ड~: वो प्यारे…सच काहु तो रिटाइयर्मेंट के बाद यही करने वाला हूँ.
देव सोचने लगा…कितना किया है ये…किसी भी बात का बुरा ही नहीं मानता है…..कुच्छ भी कह लो…बड़ा शातिर है ये बॉन्ड……!
पर सवाल फिर वही आ खड़ा होता है प्यारे….बॉन्ड बोला.
देव~: अब क्या सवाल रही गया….आपके पास हर सवाल का जवाब है…इसका भी जोगा.
बॉन्ड~: सवाल ये है प्यारे की इन सबमें तुम्हारा क्या रोल है….तुम क्या कर रहे हो….एक बार का खुलासा कर दम की मैं ये जान चुका हूँ की तुम्हारा चेहरा वास्तविक है…ना मास्क लगा है..ना ही कोई प्लास्टिक सर्जरी हुई है…..फिर इसका मतलब तुम देव नहीं हो…फिर कौन हो…और क्या कर रहे हो….?

देव~: वो…बॉन्ड…आपने तो मुझे एक झटके में नकली कह दिया….मगर कानून सबूत माँगता है….पहले सबूत दो….फिर मैं भी मान लूँगा…!

बॉन्ड~: अगर तुम छल्लंगे कर रहे हो तो मैं वादा करता हूँ …बाकी के सवाल भी तब पूछूँगा जब तुम खुद कबूल करोगे की तुम देव नहीं हो….!
देव~: पहले सबूत लाओ…?

बॉन्ड~: जरूर लौंगा प्यारे और बहुत जल्द….?

देव~: तो फिर मेरा भी वादा रहा ..मिस्टर.बॉन्ड…बिना किसी ना नूकर से अपनी हार मान लूँगा…मगर ये कभी नहीं होगा…
बॉन्ड~: होगा प्यारे…जरूर होगा

देव ~: नामुमकिन…

बॉन्ड~: नामुमकिन को मुमकिन करना ही बॉन्ड की पहचान है प्यारे….बहुत जल्द मिलेंगे…इंतजार करना…..बेस्ट ऑफ लक.

देव~: बेस्ट ऑफ लक बॉन्ड…..
बॉन्ड पल में ही वहाँ से गायब हो गया.

आज देव का चेहरा गंभीर नज़र आ रहा था….उसे जाने क्यों लग रहा था की बॉन्ड ने जो कहा है कर के दिखाएगा….
फिर देव मुस्करा उठा….खुद से ही बोला~:” यही चाहिए मुझे…फिर मैं परेशान होने के बजे जश्न मना चाहिए….जो चाहता हूँ वो बहुत जल्द होगा.
आख़िर देव चाहता क्या था….क्या खुद मुसीबतो में फँसना चाहता था.अगर नकली देव था तो फिर ये सब क्यों कर रहा था…आख़िर क्या कारण था…परिवार के सारे गुनहगारो को सजा दे चुका था….फिर क्या था…ये मकड़जाल ???????

बॉन्ड की अँगुलिया इस वक्त लेपटॉप के केयबओरड पर थिरक रही थी…..अचानक बॉन्ड की आंखें चमक उठी……बॉन्ड ने गौर से देखा और लेपटॉप बंद कर दिया…..
बॉन्ड अपने बिस्तर पर अढ़लेता सा कुच्छ सोच रहा था..
तरीन…तरीन…बॉन्ड का मॉब बजा….आवाज़ सिर्फ़ एक बार गूँजी.
बॉन्ड ने देखा…नो. मुन्ना का था…कॉल रिसीव की…
बॉन्ड~: क्या बात है प्यारे….इतनी रात गये भी चैन नहीं,है क्या…11 बज चुके है प्यारे…सो जाओ.
मुन्ना~: यार क्या बताऊं…इस केस ने तो मेरी नींद उड़ा दी है…
बॉन्ड~: अब कौनसा तिलिस्म देख लिया प्यारे….?
मुन्ना ने दिन भर की पूछताछ का सारा ब्यौरा दिया.
अब बॉन्ड भी थोड़ा गंभीर हुआ बोला~: सही जा रहे हो प्यारे….कुच्छ ऐसा ही हाल अपना है….साला मामला ही कुच्छ इस तरह उलझा है की पूरा सुलझ ही नहीं रहा है….
मुन्ना~: क्या हुआ…
बॉन्ड~: होना क्या था प्यारे….तुम्हारे और मेरे सारे अनुमान गला निकले….
मुन्ना~: जैसे…?
बॉन्ड~: जैसे की देव का चेहरा नकली नहीं असली है….उसने कोई मास्क या सर्जरी नहीं करवाई है…..मैंने चेक किया था.
मुन्ना~: वो कैसे…?
बॉन्ड~: नकली चेहरे पर पसीना नहीं आता…और आता भी है तो बेहद कम प्यारे….पर वो कमबख्त चेहरा तो मुझसे भी ज्यादा पसीना उगल रहा था….पत्ता कुछ ही देर जैसे नहा गया..
मुन्ना~: आस….फिर ?
बॉन्ड~: वो साला खुद को देव कहता है मगर पहचानता किसी को भी नहीं….
मुन्ना~; मतलब…?
बॉन्ड~: मतलब साफ है प्यारे…मैंने कुच्छ तस्वीर डाली थी….जो किसी सेवा आश्रम के लोगों की थी….पत्ते ने झूठमूठ का हाथ रख दिया….कह दिया ये ही प्रो. सैनी है है….उसे इतना ही पता नहीं की जो तस्वीरें मैंने दिखाई थी वो लोग मुंबई में रहते है…..साला खुद फँस गया……उसने खुद भी खुद साबित कर दिया की वो देव नहीं है.
मुन्ना~: फिर तुमने उसे झूठा साबित क्यों नहीं किया…?
बॉन्ड~: साला सबूत माँग रहा था….दिल तो किया की कह दम पर चुप रहा..
मुन्ना~: सही किया यार.
बॉन्ड~: मुन्ना प्यारे….मामला साला इतना सीधा है नहीं….कहने को तो ठाकुर परिवार के सारे गुनहगार सजा पा चुके है…..मगर ?
मुन्ना~: मगर…?
बॉन्ड~: अभी भी कुच्छ है जो छिपा है….या यूँ कॅह्लो…असली गुनहफार अभी छुपा है….जो सामने नहीं आया है….
मुन्ना~: सही कह रहे हो बॉन्ड….अगर सारे गुनहगार सजा पा चुके होते तो ये मामला कब का बंद हो चुका होता…नहीं हुआ मतलब अभी कुछ और भी बाकी है.
बॉन्ड~: बिलकुल ठीक प्यारे….अब कुच्छ सवाल है जिनका तुम्हें पता लगाना है…?
मुन्ना~: कैसे सवाल ?
बॉन्ड~: प्यारे…मुक्ति रेप केस में रिपोर्ट क्या कहती है…?
मुन्ना~: मुक्ति का रेप 3 लोगों ने कई बार किया था…?
बॉन्ड~: किस किस ने प्यारे…?
मुन्ना~: पहला रोहित गुप्ता…दूसरा उसका दोस्त…तीसरे का पता नहीं….?
बॉन्ड~: उसका पता करना है….और दूसरी बात ये है प्यारे की जिस सबूत के पीछे ये सारा कांड हुआ …वो कहाँ गया…उसको भी ढूंढ़ना है..!
मुन्ना~: मेरे हिसाब से वो सबूत देव के ही पास होगा…?
बॉन्ड~: वो प्यारे….तुम्हारा हिसाब तो एकदम दुरुस्त है….हमारी संगत में रहकर ज़हीन हो गये हो आजकल प्यारे…..!
मुन्ना~: अब संगत का असर तो होगा ही ना…क्या करे…?
बॉन्ड~: अब तक हमें जो भी पता चला है प्यारे लोगों की ज़बानी सुना….हमें सुनाने वालो ने किसी और सुना है…कहानी काफी हद तक सही है…मगर है अधूरी….इसलिए तुम तीसरे गुमनाम की पॉल खोलो…मैं इस देव प्यारे की और उस सबूत पॉल खोलूँगा…..क्योंकि जहाँ देव वहीं सबूत ……अपने काम में जूट जाओ….फिलहाल मुझे बक्षो….और चैन से सोने दो यार…..कई दीनों बाद चैन की नींद लूँगा….
मुन्ना समझ गया की बॉन्ड सच के करीब ही है…उसने बॉन्ड से ” गुड नि8″ कहा और कॉल डिसकनेक्ट कर दिया…
बॉन्ड बड़बड़ाया~” तेरी भी नि8 गुड हो प्यारे….और बॉन्ड बिस्तर के हवाले हो गया…थोड़ी ही देर में वो घोड़े बेचकर खर्राटे मर रहा था.

आख़िर है क्या ये सारा माजरा…..ठाकुर परिवार का वो तीसरा गुनहगार कौन था…क्या जज या कोई और….क्या बॉन्ड सबूत ढूँढ पाएगा…क्या मुन्ना तीसरे अपराधी तक पहुँच पाएगा…..कौन था जो सबको नाचा रहा था….आख़िर क्या चाहता था…अगर वो देव था तो अपने दुश्मनों को जिस तरह रास्ते से हटाया था तो फिर तीसरे को क्यों छोड दिया…आख़िर उसके साथ क्या करना चाहता था….पर एक बात सच है की बॉन्ड का अंदाज़ा सच था….कोई तीसरा भी था जो इस जुर्म का असली खिलाड़ी था…जो अभी पर्दे के पीछे था……….आख़िर कौन था वो ?;;;???????
?
आज की सुबह भी इस साल की सबसे अलग थी…आज बहुत कुच्छ बदलने वाला था…..आज कई जिंदगिया का एक नया मोड़ लेने वाली थी….
आज प्रिया का आर्तिकल एक साथ कई सहरो में च्चपा था.
प्रिया की सारी मेहनत , सबूतों के साथ, कई लोगों के बयानो के साथ छपी.
अख़बार के मार्केट में ही आते तहलका मच गया….सच कहे तो मीडिया सबकी आवाज़ होता है और वही हुआ….प्रिया का आर्तिकल ने लोगों की आंखों नाम कर दी…
प्रिया ने ठाकुर खंडन की कहानी को कुच्छ ऐसे मार्मिक ढंग से च्चपा की हर दिल रो पड़ा.
ये कहानी हर दिल में घर कर गयी….सबकी की जुबान प्रशासन की खिल्ली उड़ाने लगी और ठाकुर परिवार से हुए अन्याय को पुरजोर स्वर में उठाने के लिए मचलने लगी…..जिसने भी पढ़ा….खुद को दर्द से अछूता नहीं रख पाया…
कितना बड़ा खिलाड़ी था देव…..प्रिया जहाँ अपने परिवार की हत्या का सच खोजने निकली थी….वो आज ठाकुर परिवार की पैरवी में लग गयी.
ऐसा ही हाल , हर उस आदमी का हुआ ….जिसने प्रिया का च्चपा आर्तिकल पढ़ा….बड़ा अजीब सा माहौल था…..एक साथ कई सहरो का…..!
बची खुची कसर न्यूज चॅनेल्स ने पूरी कर दी….न्यूज रीडर्स सुबह से बस यही दोहरा रहे थे….बार बार लगातार….जिस भी चॅनेल पर देखो….यही चल रहा था….!
दोपहर होते होते इस मामले ने ऐसा टूल पकड़ा …जो पिछले कई सालों में नहीं हुआ वो आज हो गया.
आधे देश की सामाजिक सँस्थाए सड़कों पर उतार आई…..ठाकुर परिवार को ढूंढ़ने और उनके साथ इंसाफ करने के लिए आवाज़ बुलंद करने लगी…
जो बात आज तक चाँद लोगों की जहाँ में था….आज आधे देश की जुबान पर था….हर शहर का यही हाल था….
शाम होते होते ये एक आंदोलन का रूप ले चुका था……
प्रेससोर बढ़ने लगा…नेताओं को राजनीति करने का मौका मिला तो कुछ नेताओं को अपनी कुर्सी खतरे में नज़र आने लगी……आनन फानन में सब राजनीति डालो ने आपातकालीन बैठक बुलाई….मुद्दा देव के परिवार था….सबने अपनी अपनी राय दी…..कोई कुच्छ कह रहा तो कोई कुच्छ …..आख़िरकार सबकी सम्मति से ये तय किया गया की ये केस सिड को रफ़्फ़ेर किया जाए और उन्हें . . के साथ . लोगों को ढूंढ़ने का . दिया जाए….
आख़िर में सिड को केस दिया गया….उन्हें ये विशेस अधिकार दिया गया….की कोई भी नेता या पॉवेरफ़ुल्ल डिपार्टमेंट आपके काम में हस्तच्चेप नहीं कर पाएगा…..आप सीधा पे.में. को रिपोर्ट करोगे.

कमाल की बात थी की जिस परिवार के गायब होने का अफ्शोस सिवाय चाँद लोगों किसी को परवाह नहीं थी…..आज मानो सारा देश इसकी सच्च्छाई तक पहुँचने के लिए मारा जा रहा था.
मानो सब एक साथ इस केस को सुलझाने में लग गये हो.

इस मामले को सबने देखा पर चाँद लोग ऐसे थे जिनकी खास दिलचस्पी थी.

मसलन…प्रिया…मुन्ना….बॉन्ड …..देव और दो लोग और थे जिनकी भी दिलचस्पी इन लोगों से कम नहीं थी….फर्क सिर्फ़ इतना था की एक के चेहरे पर चमक थी….तो दूसरे के चेहरे पर मातम…मायूसी….!
प्रिया ने इस केस को इतना नाज़ुक और गंभीर बना दिया…..

प्रिया इस वक्त अपने घर में बैठी यही सब देख रही थी…कैसे उसके आर्तिकल ने आम आदमी को खास बना दिया….
प्रिया को दुख इतना था की काफी सारे रहस्यो पर से परदा नहीं हटा पाई थी…..पर उसे लग रहा था जो कुच्छ चुत गया है….उसे देश की जनता करवा देगी….प्रिया ने चैन की साँस ली ….प्रिया ने मन में देव से एक बार मुलाकात करने का निश्चय किया…..इसके लिए उसे दिल्ली जाना पड़ेगा….प्रिया सुबह का इंतजार करने लगी…!
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सारे देश का कानून जूट चुका था…..देव के परिवार का पता लगाने……जिसे देखो मानो सिर्फ़ यही एक काम बच्चा हो…..बॉन्ड पहले से ही दिल्ली में था….प्रिया भी पहुँच चुकी थी….और मुन्ना भी दिल्ली आ चुका था.
मुन्ना के दिल्ली आने का कारण था….उसके सीनियर ने उसे तलब किया था…….
मुन्ना अपने ऑफिस पहुँचा….सीधा डाइरेक्टर के केबिन में घुसा…..सिड डाइरेक्टर थे मिस्टर. दोष….
मिस्टर. दोष ने मुन्ना को बैठने के लिए कहा….मुन्ना बैठ गया.
मुन्ना~: इसे सर….मुझे अर्जेंट्ली क्यों बुलवाया गया है…..?
दोष~: मिस्टर. सींग….आज जो देश में चल रहा है….वो सब तो तुम जानते ही हो….
मुन्ना~: जी सर….
दोष~: स्क से सीधा आदेश है की इस मामले की झड़ तक पहुँचा जाए…जल्द से जल्द …वरना देश के लॉ.न.आर्डर खतरे में पड़ सकता है…इसलिए तुम्हें याद किया है….!
मुन्ना~: आपको याद करने की जरूरत ही नहीं थी…
दोष~: क्या कहना चाहते हो…?
मुन्ना~: मैं इस केस पर पहले से ही काम कर रहा हूँ.
दोष~: वो कैसे…?
मुन्ना~: असल में सर जज गुप्ता का ठाकुर परिवार की गुमशुदगी में हाथ था….मेरी तहकीक़त में ये बात सबूत चीख चीख कर कह रहे थे…..इसकी झड़ तक पहुँचने का एक ही जरिया बच्चा था….ठाकुर परिवार के और जज के बीच के संबंधों का पता लगाना….वही मैंने किया…
दोष~: क्या पता चला ?
मुन्ना~: अख़बार में एक एक शब्द सच च्चपा है सर…बिलकुल यही हुआ था ठाकुर परिवार के साथ.
दोष~: फिर ठाकुर परिवार कहाँ गया…?

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