Antavasna Hindi Sex Stories मकड़जाल 8

बॉन्ड~: ये सब छोड प्यारे….आगे क्या करने का मूंड़ है मेरी जान….?
मुन्ना~: उसके बाप और पूरे खंडन की कुंडली निकालूंगा और तुम ?
बॉन्ड~: तुम तो जानते हो प्यारे…मेरा काम करने का अंदाज़ थोड़ा अजीब है….मैं पहले देव से मिलूँगा फिर आगे की आगे सोचूँगा.
मुन्ना~: जैसी तेरी मर्जी….!
मुन्ना जनता था की बॉन्ड सिर्फ़ अकेला काम करता है…अपने ही अंदाज़ में…उसे कोई राय देना…सूरज को दीपक दिखाने जैसा है..
मुन्ना ने देव का पता दिया और जितना भी जनता था सब कुच्छ बॉन्ड को बताया …
मुन्ना~: जितना जनता था सब बता चुका हूँ.
बॉन्ड~: इतना काफी है…..अब इस गाथा को बंद कर….बोरियत होने लगी है….कुच्छ खाने का इंतजाम कर…भूख लगी है….साली आंखों के आगे खाने की प्लेट नाच्छ रही है….!
मुन्ना मुस्कराया…इंटरकम पे खाने का आर्डर दिया और खाना खाया…फिर आराम करने लगे…
सुबह बॉन्ड दिल्ली जाने वाला था और मुन्ना आगे की जानकारी जुटाने में लगने वाला था…रात काफी हुई तो दोनों ने अपनी बातों को विराम दिया और सो गये..
सुबह दोनों अपने अपने रास्ते पे चल दिए…..
एक नये धमाके का सामना करने….दिमाग को फिर नया झटका खिलाने…..!!!!!!
मिस्टर. सैनी ने जो कहानी सुनाई उसे सुनकर प्रिया की आंखें गीली हो गयी….दिल रो पड़ा….बड़ी दर्द भारी कहानी थी…कहानी सुनकर प्रिया क्या किसी का भी दिल रो पड़ता…
ठाकुर परिवार के साथ बहुत ना इंसाफी हुई थी….जुर्म का तांडव उनकी जिंदगी पर बेशर्मी से चला था.
बृजमोहन ठाकुर उनका सारा परिवार लापता होने के आख़िरी पल तक बड़ी बहादुरी से लड़ते रहे थे…
कहानी,कुच्छ इस तरह थी..
ठाकुर परिवार बड़ा ही सज्जन और न्यायप्रिय था.
भी.में.ठाकुर जिस कालेज में पढ़ते थे उसी कालेज में मुक्ति पढ़ती थी…मुक्ति का एक क्लाइमेट था…रोहित गुप्ता…
वो किसी जज का बेटा था…जैसा बाप वैसा ही आयास बेटा….बड़ा ही बिगड़ा हुआ लड़का था…उसकी नज़र मुक्ति पर पड़ी…वो मुक्ति का दीवाना हो गया…..प्यार या शादी के लिए नहीं…सिर्फ़ एक रात गुजरने के लिए….वो अक्सर मुक्ति को छेड़ने लगा……
शुरू शुरू में तो मुक्ति ने ताला….पर जब रोहित की हरकतें ज्यादा तरफ गयी तो उसने अपने अंकल से शिकायत की….ठाकुर साहेब ने सारी कालेज के सामने उसको जमकर लताड़ा.
रोहित से ये बेइज्जती बर्दाश्त नहीं हुई…..एक बार उसने मुक्ति के साथ कालेज के पीछे खाली पड़ी पुरानी खंडहर जैसी इमारत में ज़बरदस्ती करने की कोशिश की….संयोग से किसी की नज़र पड़ गयी….मिस्टर. ठाकुर को सूचना दी गयी….मौके पर मुक्ति को बचाया गया और रोहित को कालेज से दिस्मीस कर दिया गया.
फिर कुच्छ दीनों बाद मिस्टर. ठाकुर और मुक्ति का किडनॅप कर लिया गया….मिस्टर. ठाकुर की आंखों के सामने मुक्ति का बलात्कार किया गया….कई बार उसे नोचा गया……मुक्ति सहन नहीं कर पाई और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया ….
मिस्टर. ठाकुर को जब होश आया तब तक मुक्ति दम तोड़ चुकी थी…..उनकी फूल जैसी बच्ची को दरिंदो ने जमकर नोचा था…
मिस्टर. ठाकुर कानून की शरण में गये….मुक्ति की लाश को प्लोसे ने पोस्टमारतें के लिए भेजा….रोहित और उसके दोस्त के खिलाफ मामला दर्ज़ किया गया…कहते है उस वक्त देव आया था…मगर मिस्टर. ठाकुर ने ये कहकर देव को कुच्छ दिन वापस भेज दिया की” मुझे कानून पर पूरा भरोसा है.देव ने काफी जिद की पर मिस्टर ठाकुर नहीं मैंने और देव को मजबूरन वापस जाना पड़ा.
मिस्टर. ठाकुर सिर्फ़ एक बात से हैरान थे की मुक्ति का रेप 3 लोगों ने किया था…लगभग 2 – 2 बार….रोहित और उसका साथी…सिर्फ़ दो थे…तो ये तीसरा कौन था….
रोहित और उसके साथी को गिरफ्तार किया गया….उसी दिन उसकी जमानत हो गयी….
मामला पूरा 6 महीने तक खींचा.
कहते है जिस अदालत में रोहित पर केस चला …उसके जज उसका ही बाप था.
गवाह और सबूत खरीदे बेचे गये…ठाकुर परिवार को डराया धमकाया गया….
दिल्ली के सबसे बारे गुंडे च्ग्गा ने धमकाया.
मगर मिस्टर. ठाकुर नहीं डरे….आख़िर कर एक रोज़ ऐसा लगा की रोहित अगली तारीख में छूटने वाला है…उसके ठीक पहले दिन मिस्टर. ठाकुर के हाथ कोई ठोस सबूत लगा…जिसमें रेप करने वाला तीसरा साक्ष् भी था…..एक वीडियो फुटेज थी..जो किसी तरह मिस्टर. ठाकुर के हाथ लग गयी…मगर इसका पता डुस्मानो को लग गया और उसी रात पूरा परिवार गायब हो गया….काफी तलाश की गयी मगर कोई खबर नहीं मिली.
आख़िरकार फैसला रोहित के हक़ में हुआ…उसे बेइज्जत बड़ी कर दिया गया….और ये ठाकुर परिवार की कहानी अधूरे में ही बंद हो गयी.
कहते देव को आस पड़ोस के लोगों ने सिर्फ़ एक रात को अपने घर में घुसते देखा था…
मगर उसके बाद वो भी गायब हो गया….
पुलिस को घर में कुच्छ भी ऐसा नहीं मिला जो देव की आइडी प्रूफ हो…..ना किसी अन्यका कोई आइडी प्रूफ…..पुलिस की समझ में नहीं आया की कोई क्यों इनके पहचान के दस्तावेज़ मिटा रहा है और क्यों..कौन है वो…?
लाख कोशिश के बाद भी पता नहीं लगा…पुलिस के पास मुक्ति और मिस्टर. ठाकुर के अलावा किसी का कोई फोटो नहीं था..
धीरे धीरे सब इसे भुलाते गये.
सैनी ने सारी कहानी सुनकर एक लंबी साँस ली….उसकी आंखों से आँसू टपक रहे थे…आवाज़ भारी हो गयी थी.
ऐसा ही कुच्छ हाल प्रिया का था….ठाकुर परिवार की कहानी ने उसे झकझोर दिया था…उसकी भी आंखें गी थी.
प्रिया ने अपनी आंखें रूमाल से पोंछी….एक लंबी साँस ली …खुद पर काबू पाया और बोली~: सर, आज एक वादा मैं आपसे करती हूँ की मिस्टर. ठाकुर के लिए मुझे कुच्छ भी करना पड़े…मैं उन्हें इंसाफ दिलाकर रहूंगी….उनकी खोई इज्जत उन्हें लौटा कर रहूंगी….अगर वो जिंदा है तो उन्हें पाताल से भी खोज निकालूंगी….!
सैनी प्रिया के तमतमाए चेहरे देखता रहा.
प्रिया फिर बोली~: पर मिस्टर. सैनी…पता नहीं मुझे ये अधूरी कहानी लग रही है…कुच्छ अब भी छुपा है….जो मुझे पता लगाना है…..कोई ऐसा है जो मुझे थोड़ा और डीटेल से बता सके…?
सैनी ~: शायद ताकिर साहेब के बारे बेटे का एक जिगरी दोस्त है जो आजकल मुंबई में रहता है…..शायद वो बता सके…?
प्रिया ने पता लिया और उठ खड़ी हुई….फाइल में से फोटो की मॉब. से फोटो खींची…ये तकुर और मुक्ति की फोटो थी…प्रिया मुड़ी तभी सैनी ने टोका~: क्या मैं जान सकता हूँ की आप इतनी बेचैन क्यों है….?
प्रिया~: मैंने बताया था ना की आर्तिकल…
सैनी~: वो झूठ था प्रिया ग…सच बताइए.
प्रिया ने कुच्छ पल सोचा और फिर बोली~: जिस जज गुप्ता ने ये सारा फ़साद किया है मैं उनकी ही बेटी प्रिया गुप्ता हूँ…..इतना कहकर प्रिया बाहर निकल गयी.
सैनी अपनी कुर्सी से कई फीट ऊपर उछाल पड़ा…उसकी आंखें फटी रही गयी….चेहरा खुला का खुला रही गया…उसने जब तक खुद पर काबू पाया…प्रिया कालेज बहुत दूर निकल चुकी थी…!!!!!!!!

प्रिया मुंबई पहुँची…मिस्टर. सैनी ने जो पता दिया था …टैक्सी उस जगह जाकर रुकी…ये एक रिहायशी इलाका था….टैक्सी ने जहाँ छोडा वो एक मुल्टिस्टोरिए बिल्डिंग थी…लगभग 7 मंज़िला इमारत…
प्रिया ने पाते पर नज़र डाली…लिखा था…अजीत यादव…..4त फ़्लोर….विलाष नगर…मुंबई.
प्रिया ने टैक्सी वाले को किराया दिया और बिल्डिंग में एंटर हो गये.
लिफ्ट के आगे एक चौकीदार बैठा था…प्रिया ने उससे अजीत के बारे में पूछा….चौकीदार ने रिजिस्टर में एंटेरी की…प्रिया के सिग्नेचर करवाए और जाने दिया.
प्रिया लिफ्ट में सवार हुई..लिफ्ट 4 त फ़्लोर पर रुकी….प्रिया बाहर निकली…..लेफ्ट साइड का फ्लैट अजीत का था….प्रिया ने बेल बजाई…..दरवाजा एक लेडी ने खोला….देखकर लग रहा था जैसी नयी नयी शादी हुई है….
शायद ये अजीत की बीवी थी…..प्रिया ने अजीत के बारे में पूछा…पता चला की वो अंदर ही है…
आज संडे था…प्रिया को अंदाज़ा था की अजीत घर ही मिलेगा…वही हुआ…प्रिया अंदर आकर लाउंज के सोफे पर बैठ गयी…..लेडी अंदर अजीत को बुलाने चली गयी.
अंदर से एक 26 एक साल का हॅंडसम लड़का बाहर आया…प्रिया को हेलो किया और सामने के सोफे पर बैठ गया.
अजीत~: माफ कीजिएगा…मैंने आपको पहचाना नहीं.
प्रिया~: मेरा नाम प्रिया है….मैं एक रिपोर्टर हूँ…यही मुंबई में रहती हूँ.
अजीत~: जी कहिए…क्या किडमत कर सकता हूँ …?
प्रिया~: मैं सीधा रेवड़ी से आपके पास आई हूँ.
जैसी प्रिया को उम्मीद थी…रेवड़ी का नाम सुनते ही अजीत चौकना हो गया.
अजीत~: रेवड़ी से…..मैं समझा नहीं ?
प्रिया~: आप भी तो रेवड़ी के है ना…?
अजीत~: जी हाँ….पर आप क्यों जानना चाहती है…
प्रिया ने अजीत की बात को अनसुना करते हुए कहा ~: फिर तो आप भी.में.ठाकुर और उनके परिवार को अच्छे से जानते होंगे…?
अजीत चुप रहा.
प्रिया~: मुझे पता चला है की आप जाए ठाकुर के बहुत गहरे दोस्त थे….है ना ?
अजीत ने अपनी गर्दन हाँ में हिलाई…कह कुच्छ नहीं पाया…कहता भी क्या ….प्रिया ने सवालों की बौछार कर दी….अजीत कुच्छ समझ नहीं पाया था..
प्रिया~: क्या खूब दोस्ती निभाई है आपने….?
अजीत~: क्या मतलब…?
प्रिया~: आपका सबसे जिगरी दोस्त…अपने पूरे परिवार के साथ गायब हो गया …आपको बिलकुल भी फर्क नहीं पड़ा.
इस बार अजीत के चेहरे पर दर्द झलक पड़ा……बोला~: आपको क्या पता की मुझे कितना फर्क पड़ा है.
प्रिया~: अगर आपको फर्क पड़ा है तो फिर आपने ढूंढ़ने की कोशिश नहीं की…आप तो उनके बारे सब जानते थे..?
अजीत~: प्रिया ग….ढूंढ़ा उनको जाता है ….जो गायब हुए हो.
प्रिया चौंकी…”क्या मतलब ?
अजीत~: प्रिया ग….दिल्ली का एक गुंडा च्ग्गा….जो हाथ धोकर उनके पीछे पड़ा था….उनके गायब होने में उसका ही हाथ था…ऐसे लोग किडनॅप करने के बाद किसी को जिंदा नहीं छोड़ते.
प्रिया~: आपको कैसे पता…?
अजीत~: मुझे जाए ने कई बार कहा था…आख़िरकार वही हुआ.
प्रिया~: आपने कुच्छ किया नहीं…?
अजीत~: क्या करता….बहुत चिल्लाया…पर मेरी किसी ने नहीं सुनी….और एक दिन च्ग्गा आया….मेरी आंटी की कांपती पर पिस्तौल रखी…मुझे शहर छोडने के लिए कहा…मजबूरन मुझे मुंबई आना पड़ा…!
प्रिया~: आपकी आंटी कहाँ है…?
अजीत~: पिछले साल उनका बीमारी से इंतकाल हो गया.
प्रिया~: आस…ई में सॉरी.
अजीत~: कोई बात नहीं….आप उस जज और च्ग्गा से पूछताछ क्यों नहीं करती…?
प्रिया~: नहीं कर सकती….
अजीत~: क्योंकि इस केस जुड़ा हर साक्ष् दुनिया छोड चुका है…जो बचे है वो कुच्छ बताना ही नहीं चाहते.
अजीत ~: साफ साफ कहिए.
प्रिया~: जज…उनका बेटा…बेटे का दोस्त….च्ग्गा…बस मर चुके है…!
“क्या..??..अजीत खुशी से उछल पड़ा….”अच्छा हुआ मर गये कमीने….पर कैसे हुआ ये…?

प्रिया~: किसी ने उनको आपस में ही लड़वाकर मर डाला…!
अजीत~: किसने किया ये…?
प्रिया ने देव का फोटो निकालकर सामने पटका और बोली~: “पुलिस का कहना है की सब इसका किया धारा है…!
अजीत ~: कौन है ये..?
प्रिया का दिल चाहा की अपने बाल नोंच ले..पर खुद को शांत रखा….

प्रिया को लगा की अब तक जितनी भी जानकारी जुटाई है…सब बेकार है….प्रिया ने खुद पर काबू पाया और बोली~: तुम नहीं जानते ?
अजीत~: नहीं…मैंने आज से पहले कभी नहीं देखा….कौन है ये ?
प्रिया~: कमाल है….जाए ठाकुर के कुछ दोस्त हो ….?
अजीत~: मैं समझा नहीं….साफ कहिए ना.
प्रिया~: ये देव है…देव ठाकुर
“क्या..? अजीत उछल पड़ा….नहीं…..!
प्रिया~: क्यों नहीं…?
अजीत~: ये देव नहीं है…देव को मैं अच्छी तरह जनता हूँ…वो भी तो गायब है….फिर ये देव ठाकुर कोई और होगा… !
प्रिया~: मगर ये खुद को देव कहता है…कहता क्या है…साबित कर चुका है.
अजीत~: नहीं…ये कोई और है..देव ठाकुर नहीं है.
प्रिया~: अगर देव नहीं है तो इसने खुद देव को बताया है…..इसका ठाकुर परिवार से क्या लेना देना है….क्यों इसने इस केस से जुड़े लोगों के मर्डर से ज्यादा है…..क्यों कोई जानबूझकर खुद को मुसीबत में डालेगा….क्यों ??
अजीत~: ये मुझे नहीं पता…पर ये देव ठाकुर नहीं है…पक्का कह सकता हूँ.इसका खुद की कोई निजी वजह होगी.
प्रिया~: नहीं मिस्टर. अजीत….इसकी कोई निजी दुश्मनी नज़र नहीं आती…मैंने जितनी तहक़ीकात की है….एक ही बात खुलकर सामने आईहाई की इस देव का ठाकुर परिवार से गहरा रिश्ता है….इससे जुड़ी हर बात इसी केस की तरफ इशारा करती है…..एक बात बताओ…?
अजीत~: क्या ?
प्रिया~: आप किसी इंस्पेक्टर. मनिराम को जानते है..?
अजीत~: जी हाँ…यही इंस्पेक्टर. था जब ये हादसा हुआ था…बड़ा भ्रष्ट पुलिसवाला था…एक मोटी रकम ली थी इसने मुक्ति रेप केस को दबाने में…
प्रिया~: ये खुद आजकल पुलिस हिरासत में है…?
अजीत~: क्यों ?
प्रिया~: इसे देव ने ही बर्खास्त करवाया है और कानून के लपेटे में फँसाया है…!
अजीत~: क्या…
“हाँ….प्रिया ने सारी बात डीटेल्स के साथ बताई.
प्रिया~: क्या अब भी तुम यही कहोगे की इस देव की कोई पर्सनल दुश्मनी है..?
अजीत~: कुच्छ समझ में नहीं आ रहा है….आख़िर माज़रा क्या है….मेरा दिमाग घूम रहा है..
प्रिया~: किसी की समझ में नहीं आ रहा है….शायद ये जो भी है….ठाकुर परिवार के सारे राज़ फर्श होने पर ही सच सामने आएगा….ठाकुर केस की हर डीटेल्स खुलने के बाद ही पता चल पाएगा की आख़िर है कौन और सारा रायता क्यों फैला रहा है…सब कुच्छ जाने के लिए मुझे आपकी मदद चाहिए ?
अजीत~: मैं आपके साथ हूँ…बताइए मैं क्या कर सकता हूँ…?
प्रिया~: कुच्छ सवालों के जवाब चाहिए?
अजीत~: पूछिए…क्या पूछना है,,?
प्रिया~: देव ठाकुर कही बाहर पढ़ता था…मैं सुना है वो लॉ का स्टूडेंट था…?
अजीत~: सच है…देव एक ज़हीन दिमाग का मलिक था…इसीलिए ठाकुर परिवार उसे वकील बनाना चाहता था.
प्रिया~: क्या बता सकते हो..वो कोन से कालेज में पढ़ता था…?
अजीत~: ये तो नहीं पता…पर इतना पता है की वो यही मुंबई में ही पढ़ता था.
प्रिया~: क्या….?
अजीत ~: हाँ…!
प्रिया~: आपको कैसे पता….?
अजीत~: जब मुक्ति की मौत हुई तब देव आया था…..ठाकुर अंकल बार बार उसे मुंबई लौट जाने को कह रहे थे…
प्रिया~: आपकी कोई बात नहीं हुई…?
अजीत~: नहीं….उस वक्त पूरा परिवार गुम में डूबा था….मैं सिर्फ़ एक दिन रुका था…अगले दिन लौट आया….आते वक्त मैंने अपना कार्ड दिया था.
प्रिया~: देव कभी आया…?
अजीत~: नहीं…ना ही वो आया और ना ही उसकी कोई खबर मिली.
प्रिया~: उसकी कोई फोटो…कोई और बात..?
अजीत~: नहीं है…!
प्रिया~: कोई बात नहीं….उसका हुलिया ही बता दीजिए…!
अजीत ने जो हुलिया बताया…वो हज़ारों लोगों से मिलता जुलता था….!
प्रिया ने अजीत से ढेर सारे सवाल किए….अजीत सबके जवाब.देता रहा…..
देव की पहचान तो उजागर नहीं हुई पर ठाकुर केस के काफी सारे पहलू उजागर हो गये…..प्रिया वहाँ से विदा लेकर अपने ऑफिस पहुँची.
प्रिया ने सारी कहानी अब तक मिले सबूतों के आधार पर तैयार करके च्चपने का फैसला किया…उसने मुंबई….दिल्ली और रेवड़ी के अख़बार में एक साथ च्चपने का निश्चय किया…दिल्ली और रेवड़ी में भी ताजा खबर का ऑफिस था…सबको एक एक कॉपी भिजवा दी…एक एक कॉपी हर न्यूज चॅनेल को……!
अगली सुबह धमाके की सुबह थी….अब ठाकुर केस फाइल फिर रीयोपन होने वाली थी…प्रिया की उम्मीद से भी बड़ा धमाका होने वाला था….
सब धुरंधारो को क्या पता था की कोई उनसे सारा काम करवा रहा है…ये सारे किरदार तो बेचारे सोच रहे थे की वो सब कर रहे है….पर क्या यही सच था….या कोई मकड़जाल ???????

प्रिया को लगा की अब तक जितनी भी जानकारी जुटाई है…सब बेकार है….प्रिया ने खुद पर काबू पाया और बोली~: तुम नहीं जानते ?
अजीत~: नहीं…मैंने आज से पहले कभी नहीं देखा….कौन है ये ?
प्रिया~: कमाल है….जाए ठाकुर के कुछ दोस्त हो ….?
अजीत~: मैं समझा नहीं….साफ कहिए ना.
प्रिया~: ये देव है…देव ठाकुर
“क्या..? अजीत उछल पड़ा….नहीं…..!
प्रिया~: क्यों नहीं…?
अजीत~: ये देव नहीं है…देव को मैं अच्छी तरह जनता हूँ…वो भी तो गायब है….फिर ये देव ठाकुर कोई और होगा… !
प्रिया~: मगर ये खुद को देव कहता है…कहता क्या है…साबित कर चुका है.
अजीत~: नहीं…ये कोई और है..देव ठाकुर नहीं है.
प्रिया~: अगर देव नहीं है तो इसने खुद देव को बताया है…..इसका ठाकुर परिवार से क्या लेना देना है….क्यों इसने इस केस से जुड़े लोगों के मर्डर से ज्यादा है…..क्यों कोई जानबूझकर खुद को मुसीबत में डालेगा….क्यों ??

मकड़जाल – Desi sex stories -8

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *