मैने चोदना सीखा – मेरी कहानी मेरी चुदाई

लोग मुझे प्यार से नीलू कहते है. में आप को मेरी कहानी सुनाने जा रही हूँ की कैसे मैंने चोदना सीखा. ये कहानी मैंने नेलम नहीं जागृति के नाम पहले लिखी है लेकिन गुजराती में. मैंने सोचा, यदि

में 22 साल की हूँ और दो साल से शादी शुदा हूँ. मैंने इकोनॉमिक्स में बी.ए. किया है ओरबारोड़ा की एक प्रख्यात बैंक में नौकरी करती हूँ. में और मेरे पति नियमित स्टोरी16 पढ़ते हे. हमें बहुत पसंद है. मेरे पति ने ही आग्रह किया है की में मेरी कहानी लिखूं. पहले एक खुलासा कर लगता है की हमारी तरह आप भी स्टोरी16 पढ़ते हे. इसी लिए आप को कुच्छ तथा कथित अश्लील शब्दों से एतराज नहीं होगा ऐसा मान लेती हूँ. यदि आप को ये गंदे लफ़्ज़ों पसंद ना हो तो कृपया यहीं से ही रुक जाए, आगे पढ़िए मत. क्यों की मैंने इससे गंदे शब्दों, जैसे की गांड, बुर्, चुत, लंड, योनि वगैरह, भरपूर इस्तेमाल किए है इस कहानी में. क्या करूँ ? कहानी का विषय ही ऐसा है तो. सच बताऊं ? ये गंदे शब्द लग्न जीवन में मसाला का कम करते है. में और मारे पति चुदाई वक्त बहुत गंदी बातें करते है; इन से चुदाई का मजा ओर तरफ जाता है. आप भी ट्राइ कीजिएगा. एक सवाल आप मुझसे पूछेंगे: मेरे जैसी पढ़ी लिखी कम उमर की शादी शुदा लड़की ऐसा डर्टी कैसे लिख सकती है, उसे शर्म ना आई ?

तो, जनाब, जवाब है, ना, ना आई शर्म. क्यों आए ? जिंदगी के साथ घनिष्ठ जुड़ी हुई और अत्यंत आनंद जनक क्रिया के बारे में लिखते हुए शर्म कैसी ? टाँगे पसारे लंबा लंड लिए चुदवाने में कहाँ शर्म आती है ? कौन सी पत्नी अपने पति से ऐसे चुड़वाती नहीं है ? कौन सा प्रेमी अपनी प्रेमिका को ऐसे चोदता नहीं है ? हाँ, एक बात पक्की. आज से एक साल पहले मुझे बहुत शर्म आती ये कहानी लिख ने में. शादी से पहले और शादी के बाद करीबन एक साल तक में खूब शर्मीली रही. इन से सुहाग रात में मेरे पति को जो मुसीबत का सामना कर ना पड़ा इस की कहानी फिर कभी लिखूँगी. होल होल मेरे पति ने मेरी शर्म तोड़ मुझे बेशरम बना रक्खा है. मेरी योनि की झिल्ली तोड़ ने में उन्हें एक घंटा लगा लेकिन हया का पर्दा तोड़ ने में एक साल लगी. पहले आप को परिचय करवा दम. सब से पहले में. माता अंकल की में अकेली संतान हूँ. पिताजी गवर्नमेंट सर्वेंट थे, हर थोड़े साल उन की बदली अलग अलग स्थानों पर होती रही. मेरी शादी के च्छे महीने आगे ही वो रिटायर हुए और बरोडा में रहने लगे. में तेरह साल की थी जब पिताजी ने मुझे एक रेसिडेन्षियल कॉलेज में भरती किया. उधर में चार साल रही. आख़िर 12वी की परीक्षा दे कर निकली तब में सत्रह साल की हो गयी थी. उन दीनों की ये कहानी है.

मेरे पिताजी की एक बड़ी बहन है, हमारी सविता फूफी. फूफा है मनभाई. वो लोग काफी धनवान है. बरोडा से 40 मिले दूर उन का 200 एकड़ का बड़ा फार्म है. रहने के वास्ते बड़ा दो मंजिल का मकान है. उन के अलावा वर्कर्स के बीस कुटुम्ब भी फार्म में रहते है. फार्म के एक कोने में छोटा सा तलब है. किसानी के साधन उपरांत अच्छी किस्म की दस एक गाएँ और दो घोड़े भी है. फूफी के दो लड़ाकें है. बारे रजुभाया ने में भी ए किया है और फूफा को फार्म की देख भाल में मदद करते है. उन की शादी चार साल से सीमासे हुई है लेकिन अब तक संतान हुआ नहीं है. मेरे तरह सीमा भी बीए है. फूफी के छोटे लड़का है रवि, मेरे कलेजा की कोर, मेरे हे के हार, मेरे प्यारे प्यारे पति. रवि 25 बरस के है. मेडिकल कॉलेज के अंतिम एअर में पढ़ते है. उँचाई 5 8, वजन 150 ल्ब्ष, पतला बदन. रंग सांवला. चहरा मोहक, थोड़ा सा राजेश खन्ना जैसा. बाल काले और घूंघरले. चौड़ा सीना और मस्क्युलर हाथ पाँव.

ये सब तो ठीक है. उन का सब से महत्व का अंग है है उन का वो. समाज गये ना आप? उन का शिश्ण् (पेनिस, गुप्त अंग, लोड्‍ा). उन का कहना है की सोए हुए पेनिस को लोड्‍ा कहते हे और वो चोदते वक्त खड़ा हो जाए तब उसे लंड कहते हे. रवि का लोड्‍ा 6 लंबा और डेढ़ इंच मोटा है. रबड़ की नली के टुकड़े जैसा नर्म है, पेट पर पड़ा हुआ वो सोया हुआ निर्दोष बच्चा जैसा दिखता है. लंड का मट्ठा चिकना है और टोपी से धक्का रहता है, हिलना की टोपी आसानी से खींची जा सकती है. रवि कहते हे की लंड का एक मात्र कम है: पेशाब करना. उठे हुए लंड की रंगत कुच्छ ओर है. एक तो ये की वो तरफ कर 8 लंबा और ढाई इंच मोटा हो जाता है. खून की नसें भर आती है. मत्थे का रंग नीला सा हो जाता है. दंडी अकड़ कर लकड़ी जैसी कड़ी हो जाती है. बिना पकड़े अपने आप वो टॉप जैसा खड़ा रहता है. थोड़ी थोड़ी देर में वो ठुमका लगता है, तब वो ज्यादा मोटा और ज्यादा कड़ा हो जाता है. में लंड हाथ में ले कर हिला सकती हूँ लेकिन बाल नहीं सकती. रवि के लंड को छूते ही मेरी गांड गीली होने लगती है.

लंड का सब से मोटा हिस्सा है उस का मट्ठा. मत्थे के नीचे टोपी चिपकी हुई है जिसे फ्रेनुं कहते हे. फ्रेनुं सब से सेन्सिटिव पॉइंट है. कई बार ऐसा हुआ है की रवि झड़ नहीं पाते थे, तब में मट्ठा मुँह में लिए फ्रेनुं पर जीभ फिरती हूँ और रवि तुरंत पिचकारी छोड देते है. लंड की दंडी थोड़ी सी ऊपर की ओर टेढ़ी है, कमान जैसी, और मूल के पास 3 मोटी है. इस से होता क्या है की जब रवि मुझे आगे से चोदते हे तब लंड का मट्ठा चुत की अगली दीवाल से घिस पता है और ग-स्पॉट को उत्तेजित करता है. जब वो पीछे से चोदते है (डॉगी स्टाइल) तब मट्ठा योनि की पिछली दीवाल से रगड़ता है. जब वो पूरा लंड योनि में ठूंस देते है तब लंड के मूल का मोटा हिस्सा योनि के मुँह में घुस के मुँह को ज्यादा चौड़ा करता है. चुत का मुँह चौड़ा होते ही कोलाइटिस नीचे खींच आती है और लंड के साथ घिस पति है. इन सब का एक ही नतीजा आता है, मुझे चुदाई में बहुत मजा आता है, में बहुत एक्साइड हो जाती हूँ और जल्दी से झड़ जाती हूँ.

रवि कहते हे की चुत (वेजाइना) की गहराई 4 से 5 इंच होती है. तो सवाल ये उठता है की आठ इंच लंबा लंड कैसे अंदर घुस सकता है. रवि का कहना है की चुत एलास्टिक है इसी लिए जब लंड अंदर घुसता है तब वो लंबी होती है और गर्भाशय उन्ड़े धकेल दिया जाता है. लंड बाहर निंकल ते ही चुत छोटी हो जाती है और गर्भाशय फिर नीचे आ जाता है. हर उन्ड़े धक्के वक्त लंड का मट्ठा गर्भाशय के मुँह के साथ टकराता है. फटा फट चोदते वक्त लंड के धक्के से जो गर्भाशय हिलता है इस से लड़की को खूब आनंद आता है और ऑर्गॅज़म हो जाता है.

रवि और में एक दूजे को खूब प्यार करते हे. ऐसा हो ने पर भी चुदाई के बारे में हम ओपन-माइंडेड हे, हिलना की अब तक उन्होंने मेरे सिवा ओर किसी को नहीं है और ना मैंने उन के अलावा किसी ओर के पास चुड़वाया है. लग्न बाद रवि ने मुझे हर रात चोदा है, कम से कम एक बार तो सही (मासिक के तीन दिन सिवाय). खास प्रसंग पर (दीवाली, होली, जन्म दिन, शरद पूनम एट्सेटरा) एक से ज्यादा चुदाई होती है, दो बार, तीन बार. हाइयेस्ट स्कोर पाँच बार का है. वो शरद पूनम की रात थी. खुला आकाश के नीचे हम गच्च्ची पर सोए थे. पहली चुदाई यूँ ही फटा फट हो चुकी, लेकिन रवि ुअतरे नहीं. पिचकारी छोड ने के बाद भी लंड नर्म नहीं पड़ा. मैंने चुत सिक्कोड कर लंड दबाया तो रवि ने हुए होल धक्के मारने शुरू कर दिए. दूसरी चुदाई लंबी चली. दोनों एक साथ ज़दे, लंड नर्म पड़ने लगा और रवि उतरे. उतार ने के बाद उन्होंने मुझे छोडा नहीं. मुझे लिपटे रहे, किस करता रहे और निपल्स मसलते रहे. एक के बाद एक कर के मेरे सब कपड़े उतार दिए और खुद भी नंगा हो गये. खुली चाँदनी में एक दूजे के नंगे बदन का स्पर्श होते ही हम एक्साइड हो गये. मैंने पाँव पसर तो वो बीच में आ गये. लनन्ड़ ने खुद चुत का रास्ता ढूँढ लिया और तीसरी चुदाई हो चली. एक बार फिर हम साथ ज़दे और सो गये.

एक आध घंटे की नींद के बाद में जब जागी तब रवि की उंगलियाँ मेरी चुत में आती जाती थी. मैंने लंड टटोला तो उसे चोदने के लिए तैयार पाया. में चार पाँव हो गयी और रवि पीछे से चड़े. मेरे नितंब पकड़ कर उन्होंने ज़ोर से मुझे चोदा. जब वो ज़दे तब लंड निकले बिना मुझे फ्लैट लेता दिया. मेरी चुत में ऑर्गॅज़म के फटके होते थे और लंड भी कड़ा था. दो पाँच मिनट बाद पांचवीं चदई शुरू हुई जो दस मिनट तक चली. आख़िर तक कर हम सो गये तो सुबह सात बजे जागे. मेरे बारे में में क्या बताऊं ? मेरे पति ही मेरा परिचय देंगे. उन के शब्दों में.

में न्नीलू को बचपन से जनता हूँ. मैंने उसे दूध पीती बच्ची देखी है. कभी कभी मामी उस की नॅपी बदलती थी तब उस की छोटी सी गांड मेरी नज़र अंदाज होती थी. उस वक्त मेरे दिमाग में सेक्स का कोई ख्याल आया नहीं था. किस को खबर थी की एक दिन उस गांड को चोदने का सौभाग्य मुझे प्राप्त होगा ? नीलू को कच्ची काली में से खिल कर सुगंधित पुष्प बनाते मैंने देखा है. ऐसा हो ने पर भी सुहाग रात में जब मैंने उस के कपड़े उतरे तो मुझे लगा की में कोई स्वप्न देख रहा हूँ, वो इतनी सुंदर होगी ये मैंने सोचा तक नहीं था.

नीलू 5, 2” लंबी है. वजन 120 ल्ब्ष. नाप: 33-26-36. बड़ी बड़ी काली आँखों वाला चहरा गोल है. मेकअप किए बिना ही गुलाबी रंग के चिकनी गाल है किस करने को दिल लुभाए ऐसे. मुँह का उपरी होंठ पतला और नीचे वाला भरपूर, लाल कलर का. किस करते वक्त होंठ चूसने का जो मजा आता है. हाथ और पाँव सुडौल, चिकनी और नाज़ुक. कबूतर की जोड़ी जैसे दो स्तन सीने के उपरी हिस्से पर लगे हुए हैं. संपूर्ण गोल स्तन के मध्य में एक इंच की अरेवला है और अरेवला के बीच किशमिश के दाने जैसी कोमल कोमल निप्पल है. अरेवला ज़रा सी उपासी हुई है. अरेवला और निप्पल बादामी रंग के हे. चोदते वक्त दोनों लाल रंग के और कड़े हो जाते हे और सारा स्तन भारी और कठोर बन जाता है. नीलू की निपल्स बहुत सेन्सिटिव है, जब में मुँह में लिए निपल्स चुसता हूँ तब नीलू जल्दी से झड़ जाती है. पेट बिलकुल सपाट है. पतली कमर के नीचे दो भारी, चौड़े नितंब (हिप्स, चूतड़, थापा, कूल्हे) है. जंघों मोटी गोल और चिकनी है. दो जांघों के बीच नीलू का सब से रसिक अंग है: उस की गांड. मेडिकल कॉलेज में मैंने कितनी भी देखी है लेकिन कोई इतनी खूबसूरत नहीं देखी. जब नीलू जांघें सटा कर पाँव लंबे कर के लेटतीं है तब उस की गांड उलटा हुआ टीलों जैसी दिखती है. मन्स काफी ऊपर उठी हुई है और काले घूंघरले झाट से ढकी हुई है, नीलू काट कर झाट छोटे रखती है. गांड की दरार का एक इंच ही दिखाई देता है ओर कुच्छ नहीं. जांघें फैला कर पाँव उठाने से गांड अच्छी तरह से देखी जा सकती है. बारे होंठ भरवदर है और एक दूजे से सटे होने से अंदर का हिस्सा धक्का रहता है. होंठ के बीच की दरार तीन इच लंबी है

बारे होंठ उंगलियों से आसानी से खोले जा सकते है. तब गांड का अंदर का गुलाबी कलर का हिस्सा दिखाई देता है. छोटे होंठ पतले और नाज़ुक है. वो जहाँ मिलते हे वहाँ नीलू की 1 लंबी कोलाइटिस है. क्लितोरी स्का मट्ठा छोटे से लंड के मत्थे बराबर दिखता है. कोलाइटिस के पीछे पेशाब की सुराख है और इस के पीछे योनि का मुँह. ये हुई बात जब नीलू शांत हो तब की. जब वो चुदवाने के लिए एक्साइड हो जाती है तब उस की गांड बदल जाती है. सारी गांड सूज जाती है. छोटे होंठ जामवली कलर के हो जाते है और बारे होठों के बीच से बाहर निकल आते हे. कोलाइटिस लंड के माफिक टॅटर और मोटी हो जाती है. उस का मट्ठा चेरी जैसा दिखता है और टेस्ट में भी वैसा ही लगता है. योनि गीली हो कर लॅप लॅप करने लगती है.

कोलाइटिस के नज़दीक पेशाब का सुराख है और इस के पीछे चुत का मुँह. दो साल से में हर रोज नीलू को चोदता आया हूँ लेकिन उस की चुत अभी भी कुंवारी जैसी ही है. आज भी मुझे लंड पेल ते वक्त सावधानी रखनी होती है. जब लंड अंदर जाता है तब चुत का सिकुड़ा हुआ मुँह लंड की टोपी खिसका देता है. अंदर जाने के बाद चुत के स्नायुओं लंड को जकड़ लेते हे. बाहर निकल ते वक्त लंड की टोपी फिर मत्थे पर चढ़ जाती है. इसी लिए चुदाई की शुरूआत में मुझे होल होल धक्के लगाने पड़ते हे. पंडर बीस हलके धक्के खाने के बाद चुत ज़रा नर्म होती है और लंड आसानी से आ जा सकता है. उस के बाद ही में नीलू को गहरे और तेज धक्के से चोद सकता हूँ. झड़ ने से पहले लॅप लॅप कर के चुत लंड को चूसती है और जब नीलू झड़ती है तब उस की चुत लंड को इतना ज़ोर से जकड़ लेती है की मानो मूठ मर रही हो. आप ये कहानी पढ़ ने के बाद तय कीजिएगा की चुदाई में ज्यादा लुफ्त कौन लेता है, में या नीलू.

देखा आप ने रवि मेरे बारे में क्या सोचते हे ? सच बताऊं ? जब में झड़ती हूँ तब मुझे कोई होश नहीं रहता. बस आनंद आनंद और आनंफ्ड़ का अनुभव ही करती हूँ. मेरी चुत क्या करती है, कोलाइटिस क्या करती है या लंड क्या करता है, में कुच्छ नहीं जानती. कीर, आगे की कहानी पढ़िए. तेरह साल की उमर तक मेरे मान में सेक्स का कोई ख्याल तक आया नहीं था बाद में में चार साल रेसिडेन्षियल कॉलेज में गयी. वहाँ सेक्स के बारे में सोचने का समय ही ना मिला. ऐसा भी नहीं है की मैंने सेक्स देखा नहीं था. छोटे बच्चों की नून्न्ी मैंने देखी थी, वो भी कभी कभी तातार हुई सी. मेरे दिमाग पर कोई असर पड़ा नहीं था. असली चुदाई देखने का एक मौका मिला था, मुझे. वो प्रसंग अभी भी याद है मुझे. में ग्यारह साल की थी. सीने पर छोटे छोटे नींबू जैसी चुचियाँ उभर आई थी और कोक में बाल उगे थे. में और दूसरी दो लड़कियाँ कॉलेज जा रही थी. हमारी कॉलेज गाँव बाहर थी, रास्ते में कई खेत आते थे. गरमी के दिन थे.

एका एक रास्ते में एक गढ़ी भागी आ रही थी. उस के पीछे गढ़ा पड़ा था. दो फुट लंबा काला और मोटा लंड गढ़े के पेट नीचे झूल रहा था. अचानक गढ़ी रुक गयी और पेशाब करने लगी. गढ़े ने आ के अपना मुँह गढ़ी की गांड में डाल कर पेशाब नाक पर लिया. तुरंत उस का लंड ज्यादा टन गया और पेट से टकराने लगा. पेशाब कर के जैसे गढ़ी खड़ी हुई की गढ़ा एक छलांग मर ऊपर चढ़ गया. एक धक्के में उस का आधा लंड गढ़ी की चुत में घुस गया. में तो देखती ही रही गयी, कुतूहल से. थोड़ी देर रुक ने के बाद धक्का दे कर गढ़ा गढ़ी को चोदने लगा, देखते देखते में उस का सारा लंड गढ़ी की चुत में ुअतर गया. ये सब मेरे वास्ते नया नया था. मुझे डर भी लगा की गढ़ी अब मर जाएगी.

में पूरा खेल देखती लेकिन मेरी सहेली मेरी बाँह पकड़ कर खींच के ले चली और बोली, ऐसा हमें देखना नहीं चाहिए. बाद में मैंने सहेली से पूछा की वो क्या करते थे. वो बोली, पगली, तुझे पता नहीं है ?नहीं तो, मैंने तो ऐसा पहली बार देखा मैंने कहा. सहेली शर्म से लाल लाल हो गयी, मेरे कोन में मुँह डाल के बोली, गढ़ा गढ़ी को चोदता था. तब मैंने जाना की चुदाई क्या होती है. लेकिन क्यों चोदता था ?चोदने से गढ़ी को बच्चा पैदा होता है. मेरे कच्चे दिमाग में ये बातें उतार ना सकी. सेक्स का कोई भाव भी नहीं हुआ. चार साल बाद में जब फूफी के फार्म पर आई तब माहौल बदल गया था.

एक तो मेरा बदन पूरा खिल गया था, खास टूर पर मेरे स्तन. जहाँ में जाऊं लोगों की नज़र मेरे स्तन पर लगी रहती थी. गांड पर काले काले झाट निकल आए थे. कोलाइटिस क्या और कहाँ है वो में जानती थी और हॉस्टल की लड़कियों से हस्त-मैथुन भी सीखी थी. कम नसीब से मेरी रूम पार्ट्नर बहुत पुराने विचार की थी इसी लिए हस्त मैथुन का मौका मिलता नहीं था.(डर ये था की यदि वो अतॉरिटीस को बता दे तो मुझे तुरंत कॉलेज में से निकल दिया जाए; ऐसे दो तीन किससे बने थे). दूसरे, अब मुझे सेक्स की फ़ेलिंग होने लगी थी. सिनेमा के हीरो हीरोइन के सेक्सी सीन देख कर में उत्तेजित हो ने लगी थी. ऐसे दृश्य देखने से मेरी गांड गीली गीली हो जाती थी और हस्त मैथुन का दिल हो जाता था. मौका मिलने पर कोलाइटिस रगड़ कर हस्त मैथुन कर भी लेती थी. मेरा पति कैसा होगा और मेरे साथ क्या क्या करेगा वो में सोचने लगी थी. मेरी क्यूरीयासिटी का जवाब दे सके ऐसा कोई मेरे निकट नहीं था इसी लिए में सेक्स से सजाग तो हुई लेकिन अंजान भी रही.

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