मैं लीना और मौसा मौसी 9

मैं लीना और मौसा मौसी 9+10 Antarvasna,Hindi Sex ,Kamukta,antarvasnamp3,antarvasnajokes,antarvasna2015, Hindi Sex stories,Indian Sex, antarvassna,chudai रघू ने मौसाजी के चूतड़ चौड़े किये और अपना लंड धीरे धीरे उनके बीच उतारने लगा.

“आह … मजा आ गया …. ऐसे ही …. डाल दे पूरा मेरे राजा …. और पेल मेरे शेर” मौसाजी मस्ती में चहकने लगे.

“बाबूजी आज पूरा चोद दूंगा आप को … धीरज रखो …. ये लंड आप के ही लिये तो उठता है …. आप की खातिर मैं इस राधा को भी नहीं चोदता ….. आह … ये लो … अब सुकून आया?” रघू ने जड़ तक लंड मौसाजी के चूतड़ों के बीच गाड़कर पूछा.

“आहाहा … मजा आ गया …. वो बदमाश रज्जू भी होता तो और मजा आता …. कहां मर गया वो चोदू” दीपक मौसाजी कमर हिला हिला कर रघू का लंड पिलवाते हुए बोले.

“आपही ने तो भेजा उसको बजार. अभी होता तो आपके मुंह में लंड पेल देता बाबूजी, आप का मुंह ऐसे खाली नहीं रहता.” राधा बोली.

“भैयाजी, वैसे तो रज्जू बहूरानी को घूर रहा था दोपहर को, बहूरानी ने रिझा लिया है उसको” रघू बोला.

“हां लीना भाभी की चूंचियां देखीं होंगी ना उसने! तुमने नहीं देखा जी, क्या मस्त दिख रही थीं ब्लाउज़ के ऊपर से. मेरा तो मन मुंह मारने को हो रहा था” राधा पड़ी पड़ी गांड मरवाते हुए बोली.

“अरी ओ रधिया, मौसी से पूछे बिना कुछ लीना भाभी के साथ नहीं करना. मुंह मारना है तो मौसी के बदन में मार जैसे रोज करती है” रघू बोला, वो अब घचाघच दीपक मौसाजी को चोद रहा था.

“बाबूजी, आप चुप चुप क्यों हो, बहूरानी अच्छी नहीं लगी क्या” राधा बोली.

“अरे जरूर लगी होगी. पर अनिल भैया ज्यादा पसंद आये होंगे भैयाजी को, है ना भैयाजी?” रघू बोला.

मौसाजी कुछ कहते इसके पहले मैं वहां से चल दिया. मेरी इच्छा तो थी कि रुक कर सब कुछ देखूं पर मेरा लंड ऐसे सनसना रहा था कि रुकता तो जरूर मुठ्ठ मार लेता या अंदर जा कर उनमें शामिल हो जाता जो बिना लीना की अनुमति के मैं नहीं करना चाहता था. और रज्जू आ रहा था, दूर से खेत में दिख रहा था, उसकी नीली शर्ट से मैंने पहचान लिया. वो देख लेता तो फ़ालतू पचड़ा हो जाता. इसलिये बेमन से मैंने धीरे से खिड़की बंद की और चल दिया.रज्जू पास आया तो मुझे देखकर रुक गया और नमस्ते की.

मैंने पूछा “कैसे हो रज्जू? घर जा रहे हो लगता है?”

“हां भैयाजी. आप अकेले ही आये घूमने, भाभीजी को नहीं लाये?” उसने पूछा.

“वो मौसी के साथ है, मैं अकेला ही घूम आया. लगता है मौसाजी तुम्हारे घर पर ही हैं, रघू और राधा के साथ बातें कर रहे थे” मैंने कहा.

रज्जू कुछ नहीं बोला. नीचे देखने लगा.

“वैसे मैं अंदर नहीं गया, बस खिड़की से उनकी बातें सुनीं. तुम्हारा जिक्र कर रहे थे मौसाजी, बोले तुम भी होते तो अच्छा होता” मैंने मुस्करा कर कहा.

रज्जू मेरी ओर कनखियों से देख कर मुस्करा कर बोला “हां अनिल भैया, मौसाजी को बड़ी फ़िकर रहती है हम सब की. हम तीनों मिलकर उनकी सेवा करते हैं जैसी हो सकती है, आज मैं नहीं था तो नाराज हो गये होंगे. मैं जा कर देखता हूं”

“रज्जू, भई तुम्हारी लीना भाभी को खेत में घूमना है, पहली बार गांव आई है, उसको घुमा लाना कभी. गांव को हमेशा याद करे ऐसी खुश होनी चाहिये तेरी लीना भाभी” मैंने कहा.

“हां अनिल भैया, भाभी को तो ठीक से पूरा घुमा दूंगा. आप नहीं चलोगे घूमने? हम तो आप को भी घुमा देंगे आप का मन हो तो” रज्जू ने पूछा.

“हां, देखूंगा. मौसी से जरा पूछ लूं कि क्या प्रोग्राम है. पहले लीना को तो घुमा, ठीक से घुमाया तो मैं भी घूम लूंगा” मैंने उसकी ओर देखा और बोला.

रज्जू मुस्कराकर अच्छा बोला और अपने घर की ओर चल दिया.

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