महक की दुनिया 3

सुबह ५-६ बजे महक antarvasna को ऐसा लगा की कोई kamukta उसके मम्मे धीरे धीरे सहला रहा हो ….. उसने सोचा शायद सौम्या होगी वह नींद में ही मुस्कुराई ….. जब थोड़ी देर बाद वो हाथ महक के टॉप के अन्दर घुसा….और महक के नंगे चुचक सहलाने लगा
तब जा के महक को महसूस हुआ की वो तो मर्दाना हाथ था
उसने उनींदी आँखों से देखा …….
मामाजी उसके बाजू में लेटे थे….. और बड़े प्यारसे उसके चुचकोसे खेल रहे थे
महक उन्हें देख मुस्कुराई
मामा बोले “महक बेटा ….. थैंक यू …”
महक: ये थैंक्स किसलिए मामाजी
मामा: बेटा …. आज तूने मेरी कई सालो की प्यास बुझा दी इसलिए
और उन्होंने बाजूमे सोई पड़ी मामी की ओर इशारा किया
महक: ओह्ह वो ….. कैसा लगा मामाजी इतने सालो बाद …. मामी को चोदकर…
मामा : क्या बताऊ बेटा …… मैं तो इस लम्हे के लिए तरस गया था ….. आज तुम्हारी वजह से ये संभव हुआ है ….. मै तो आज से तेरा गुलाम हो गया हु रे …
मामाजी की बात सुनकर महक हसने लगी
मामा बाते करते करते बड़े प्यार से महक के उरोजो को सहला रहे थे
मामा: मुझे पता है ……
महक : क्या
मामा: आज तुम प्यासी ही सो गयी ……
महक: चलता है मामाजी ….. उससे जादा मामी की प्यास बुझाना जरुरी था
मामाजी ने महक के अधरों को चूमकर बोला “आ जा बेटी ….. तेरी प्यास मिटा दू …….
महक का दिल ख़ुशी से झूम उठा
पलंग पर मामाजी और सौम्या भी सोई पड़ी थी
मामाजी ने महक का हाथ पकड़ कर उसे उठाया
और बाजूमे सोफे की ओर ले चले
मामाजी ने महक को पीछे से आगोश में लिया और उसकी गर्दन चूमने लगे
उनके हाथ महक की चुचाको से खेल रहे थे
उन्होंने अपना एक हाथ महक की जालीदार निक्कर में घुसाया
और उसकी चूत को हौले हौले मसलने लगे मामाजी का हाथ अपने चूत से लगते ही महक मदमस्त हो उठी ….
महक ने अपनी बाहें उनके गले में पिरो दी और गर्दन पीछे झुका कर अपने प्यासे होठ उन्हें परोस दिए
मामाजी ने उसके रस भरे होठ अपने होठोके गिरफ्त में लिए और उन्हें चूसने लगे
कुछ देर चले इस लिप लॉक के बाद महक ने हाथ पीछे कर मामाजी का लंड टटोला
मामाजी का हथियार अपने पुरे शबाब पे था
उसकी गर्मी और कड़कपन का अहसास पा कर महक अपने आप को रोक ना सकी
उसने मामाजी को सोफे पर धकेला और वो उनके आगे घुटनो के बल बैठ गयी
मामाजी के लंड के ऊपर का सुपाड़ा मोटा था
उनके लंड के मुँह से पानी जैसा चिपचिपा रस निकल रहा था
महकने उनकी आँखों में झाँका…..मामाजी उसकी हरकतों को गोर से देख रहे थे
महक: मामाजी मैं आपको इतनी खुशी देना चाहती हु जितनी किसीने भी नहीं दी होगी
और उसने अपनी जीभ पूरी बाहर निकाली और स्लो मोशन में अपने सिर को उनके लंड पर झुकाया
उसकी आँखें लगातार मामाजी के चेहरे पर टिकी हुई थी
महक ने अपनी जीभ उनके लंड के टिप पर लगायी और उससे निकलने वाले रस को चाट कर अपनी जीभ पर ले लिया
महक ने मामाजी के मुसल को चूमा
उसकी लम्बाई पर जुबान चाते हुए …उसने पूरा सुपाडा गपाक से मुह में भर लिया

मामाजी ने एक लम्बी आह भरी
महक खिलखिला कर हस पड़ी
फिर उसने अपना पूरा ध्यान अपने मनपसंद खिलौने पे लगाया
मामाजी का पूरा लंड मुह में ले कर चूसते चूसते वो उनकी गोटिया भी सहला रही थी
मामाजी के उस विकराल लंड से उसका पूरा मुह भरा था
मामाजी भी अब मस्ती में महक पे मुह को झटके मार मार के चोद रहे थे
मामाजी का लंड महक को अपने गले तक महसूस हो रहा था
मामाजी को जब ऐसा लगा की वो अब झड सकते है … तब उन्होंने महक को रोक दिया
फिर मामाजी सोफे पर ही पालथी मर के बेठे और महक को अपने खड़े लंड पे बिठाया
और उसे पूरी तरह जकड लिया ….
महकने अपनी टाँगे और हाथोसे उन्हें जकड लिया था
मामाजी उसे अपनी बलिष्ट भुजाओं से हलके हलके उछल रहे थे