भाभी की शॉपिंग, मेरी भाभी और वो

चाय पे के मैं घर वापस आ गया. मैंने मोबाइल चेक किया तो वेट्स आप पे श्रुति का मेसेज आया हुआ था.
श्रुति: ही!
मैं: ही, हाउ आर यू?
श्रुति: बारे लोग, इतनी देर में रिप्लाइ करते हैं.
मैं: अरे ऐसी कोई बात नहीं है, ई हद गॉन सम्वेर.
श्रुति: ओके. यार तुमने क्या एक्साइज करवाई हैं, पेन हो रहा है मुझे.
मैं: ओह, कहाँ पेन हो रहा है?
श्रुति: कहाँ क्या? पूरी बॉडी पेन कर रही है.
मैं: डॉन’त वरी. 2-3 दिन पेन रहेगा फिर ठीक हो जाएगा. एक्साइज स्टार्ट करने पे सब को होता है.
श्रुति: मतलब 2-3 और दर्द सहना पड़ेगा?
मैं: वैसे एक सल्यूशन है.
श्रुति: क्या?
मैं: मैं आ के मसाज कर देता हूँ, बहुत आराम मिलेगा.
श्रुति: किसे? मुझे या तुम्हें?
मैं: ऑफ कोर्स तुम्हें.
श्रुति: थॅंक्स लेकिन नो नींद. मैं खुद मसाज कर लूँगी.
मैं: अरे खुद ठीक से नहीं होगी. इट हंस तो भी डन इन आ प्रॉपर वे.
श्रुति: अच्छा जी! आपको बड़ा एक्सपीरियेन्स है मसाज का.
मैं: हाँ मैं पहले थाइलॅंड रहता था.
श्रुति: तो वापस क्यों आ गये यहाँ?
मैं: तुम्हें ट्रेन जो करना था. और फिर तुम्हारी मसाज करनी थी.
श्रुति: डेठ’से सो नाइस ऑफ यू. थॅंक्स लेकिन नो थॅंक्स!
मैं: और बताओ क्या कर रही थी?
श्रुति: कुछ खास नहीं ऐसे ही टाइमपास.
मैं: एक काम करना.
श्रुति: बोलो.
मैं: अपनी मेजर्मेंट ले के एक पेपर पे नोट कर लेना विद डेट ताकि बाद में पता चल सके कितना फर्क पड़ा है.
श्रुति: मेजर्मेंट मतलब.
मैं: जैसे फिगर की मेजर्मेंट लेते है लाइक 36-24-36.
श्रुति: ओह ओके.
मैं: समझ गयी या डीटेल में समझोउ.
श्रुति: नहीं नहीं. नो नींद, मैं समझ गयी.
मैं: समझदार हो.
श्रुति: बचपन से.
मैं: मज़ाक अच्छा कर लेती हो.
श्रुति: चुत उप. चलो ठीक है बायें. मुझे कुछ काम है.
मैं: ओके बायें.

तभी मेरे एक और फ्रेंड का मेसेज आ गया.

अमन: ही, हाउ आर यू?
मैं: बढ़िया यार, तू बता?
अमन: मैं भी ठीक हूँ. भाई सब सही है ना? 2-3 दिन से जिम नहीं आया तू.
मैं: यार मैं तो रोज़ जिम आ रहा हूँ, बस टाइम चेंज कर लिया है थोड़ा.
अमन: ओह! मुझे भी बता दे मैं भी उसी टाइम आ जाऊंगा.
मैं: अरे नहीं यार, तू अपने टाइम पे ही आ. कोई जरूरत नहीं है.
अमन: आबे बात क्या है, टाइम क्यों चेंज किया?
मैं: कुछ खास नहीं. बस श्रुति को वो टाइम सूट करता है. उसको कुछ एक्साइज सीखनी थी.
अमन: श्रुति कौन, वो जो लड़की जिम के बाहर मिली थी उसे दिन?
मैं: हाँ यार वही.
अमन: तो बात यहाँ तक तरफ गयी है की उसके लिए जिम आने का टाइम चेंज कर लिया और दोस्त को बताया भी नहीं. और अब उसे टाइम पे आने के लिए भी मना कर रहा है. वाउ!
मैं: नहीं यार ऐसी कोई बात नहीं है.
अमन: भाई मैं सब समझ गया. लड़की आई तो दोस्त को भूल गया. ठीक है भाई!
मैं: अरे यार. क्यों ले रहा है.
अमन: हां हां. डॉन’त वरी यार. यू कॅरी ऑन. मैं तो ऐसे ही मज़ाक कर रहा था. वैसे लड़की अच्छी है, अच्छे से सीखना उससे.
मैं: शी इस जस्ट आ फ्रेंड यार.
अमन: हाँ हाँ, मैं समझ गया भाई. ऐसी फ्रेंड भगवान सब को दे. हे हे हे…
मैं: चल यार मैं चलता हूँ, कुछ काम है.
अमन: चल ओके. ताकि केर.

अगले दिन मैं बालकनी में खड़ा हुआ था तो अंकुर भैया ने मुझे हेलो बोला.

अंकुर: हेलो!
मैं: ही.
अंकुर: यार आपसे कुछ काम था, जब आपके पास टाइम हो तब 5-10 मिनट के लिए आना.
मैं: ओके, अभी आ जाता हूँ.

और मैं उनके घर चला गया.

अंकुर: आपसे कुछ पूछना था.
मैं: हांजी जरूर.
अंकुर: जैसा की आप जानते हो हम यहाँ बिलकुल नये है. आज सॅटर्डे है तो सोचा की कही आस-पास घूम आए. आप ज़रा बताओ की आस-पास घूमने की कौन सी अच्छी जगह हैं?
मैं: घर के पास एक तो माल है जो आपने आते-जाते देख लिया होगा. उसमें ही एक मल्टिपलेक्स भी है. उसके अलावा मार्केट जा सकते हो. या थोड़ी दूर जाना है तो सिटी सेंटर जा सकते हो आप. सिटी सेंटर के लिए आपको मेट्रो मिल जाएगी.
अंकुर: थॅंक्स आ लॉट! मैं एक मिनट वाइफ से पूछता हूँ कहाँ जाना है, फिर उसी हिसाब से आप रास्ता समझा देना. अरे श्रेया ज़रा इधर आना.
भाभी: जी आई!

भाभी ने जब रूम एंटर करा तो उन्होंने मुझे देखा और थोड़ा स्माइल कर के नमस्ते की. शायद उनको मेरी कल वाली बात याद आ गयी होगी. मैंने भी नमस्ते की.

अंकुर: गौरव ने 2-3 जगह बताई है, अब डिसाइड कर लो कहाँ जाना है – माल, मल्टिपलेक्स, मार्केट या सिटी सेंटर.
भाभी – गौरव भैया मार्केट में अच्छी कपड़ों की दुकान है? मुझे कुछ कपड़े खरीदने थे.
मैं: भाभी आप मुझे सिर्फ़ नाम से बुलाया करो. भैया सुन के ऐसे लगता है जैसे मैं बहुत बड़ा हूँ आपसे.
अंकुर: हाँ यह तो काफी यंग है, तुम भैया मत बोला करो गौरव को.
भाभी: जी अच्छा.
मैं: मार्केट काफी बड़ी है तो आपको सब तरह की शॉप्स/ब्रांडेड शोरूम्स मिल जाएँगे.
भाभी: ग्रेट!
अंकुर: हम शॉपिंग करने नहीं जा रहे. घूमने जा रहे हैं. मेरे में इतनी पेशियेन्स नहीं है की मैं तुम्हारे साथ शॉपिंग कर सुकून. यार गौरव मेरी एक बात मानो लॅडीस के साथ कभी शॉपिंग पे मत जाना. पक्क जाओगे. 1 चीज़ खरीदने के लिए 10 दुकान घूमें गी. और 20 कपड़े ट्राइ करेंगी.

मैं हंस रहा था.

भाभी: मैं ऐसा कुछ नहीं करती. हम बस 15-20 मिनट में ही पूरी शॉपिंग कर लेंगे.
अंकुर: हां हां हां. वॉट आ जोक!
भाभी: अगर आप नहीं ले के चलेंगे तो मैं कैसे जाऊंगी शॉपिंग करने.
अंकुर: मुझे नहीं पता, जब मैं ऑफिस जाऊंगा मंडे को तब चली जाना अकेले. ऐसा करते हैं हम अभी माल चलते हैं, थोड़ा घूम के और कुछ कहा-पी के आ जाते हैं.
भाभी: ठीक है, कही तो चलो.
अंकुर: गौरव, आप भी चलो हमारे साथ.
मैं: अरे नहीं, आप लोग जाओ, मैं तो जाता ही रहता हूँ. मुझे वैसे भी थोड़ा काम है.
अंकुर: चलो कोई नहीं, फिर कभी का प्रोग्राम बना लेंगे आपके साथ.
मैं: शुरू. अच्छा मैं चलता हूँ. बायें. बायें.
अंकुर: बायें.
भाभी: बायें.

अगले दिन संडे था तो जिम बाँध था. कुछ खास नहीं हुआ. मंडे को मैं प्लान बना के भाभी के घर गया दिन में जब उनके हज़्बेंड घर पे नहीं होते.

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