भाभी और माँ की चुदाई 1

मेरी चुदाई के धक्के अब तूफ़ानी रफ़्तार पर थे.. हाईईइ नीरू रंडी चुद गई.. राजू मर गई मादरचोद चोद मुझे आह्ह्ह्ह बहनचोद तेज़ी से मारो मेरी चूत.. ओह राजू तेरी भाभी की चूत.. साले चोद मुझे। तभी मेरे लंड से रस की नदी बह निकली और उसी वक्त भाभी की चूत से रस की बरसात होने लगी। में आख़री दम तक चुदाई करता रहा। मेरे लंड से जब आख़री बूँद भाभी की चूत में गिर चुकी थी तो अपने लंड को भाभी की चूत में डालकर में निढाल होकर उसके जिस्म पर लेट गया। रात के 12 बजे मेरी आँख खुली तो भाभी मुझसे लिपटकर सो रही थी। फिर मैंने झुककर भाभी की चूची को किस किया तो भाभी की आँख खुल गई.. क्यों बेटा माँ का दूध पी रहे हो? अभी तक भाभी माँ को चोदकर मन नहीं भरा क्या? और चोदना चाहते हो क्या? में भाभी की बातों से फिर उत्तेजित होने लगा और उसके बदन को सहलाने लगा। भाभी तुम गंदी बातें बहुत करती हो और गाली भी बहुत देती हो.. लेकिन अच्छा लगता है तेरी गाली को सुनना। चुदाई में जितनी गंदी गाली दो.. मज़ा आता है। चलो फिर से चुदाई करे। दोस्तों ये कहानी आप चोदन डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

भाभी अब कौन सा खेल खेलते हुये चुदाई करेगें हम दोनों? भाभी बोली कि राजू अगर तुम चाहो.. तो अपनी माँ के कमरे से एक किताब ले आओ.. साली सुजाता भी सेक्सी कहानियों की शौकीन है। उसके तकिये के नीचे एक किताब ज़रूर होगी.. हम उसको पढ़कर खेल खेलेंगे.. यानी कि उसके रोल अदा करेगें? में कुछ समझ नहीं पाया.. क्या माँ भी? हो सकता है। पिता जी की मौत को भी बहुत वक्त बीत चुका था.. हो सकता है मेरी माँ सुजाता देवी भी चुदाई के लिये तड़प रही हो। माँ के बदन की कल्पना से मेरा लंड फनफना उठा.. हो सकता है कि आज सुजाता की चूत भी मुझे मिल जाये। में ये तो जानता था कि सुजाता और नीरू ने मुझसे चुदाई का प्लान बनाया था.. लेकिन यह नहीं जानता था कि माँ भी इस चुदाई में शामिल होगी या नहीं। नीरू भाभी बोली कि मेरे राजा तो चलें सुजाता के कमरे में? में चुपचाप चल पड़ा।

हम देवर भाभी मादरचोद नंगे थे। फिर मैंने नीरू की कमर में बाहें डाल रखी थी और वो मुझे चूमती हुई नीचे माँ के कमरे की तरफ ले चली। कमरे में बत्ती जल रही थी और माँ पलंग पर लेटी हुई थी। पंखे की हवा से उसका पेटिकोट उसकी जांघों तक उठा हुआ था.. भाभी ने होठों पर उंगली रखकर मुझे चुप रहने का इशारा किया और फिर माँ के तकिये से एक किताब खींच ली। हम चुपचाप कमरे से बाहर निकले.. भाभी आगे थी और में पीछे.. भाभी की गांड ठुमक ठुमक कर रही थी। उसी वक्त मेरा मन नीरू की गांड चोदने को करने लगा। उसके गोल गोल मोटे चूतड़ बहुत सेक्सी लग रहे थे। अपने कमरे में मैंने नीरू को पेट के बल लेटा दिया और उसके चूतड़ सहलाने लगा। फिर में नीरू की पीठ पर चढ़ गया और उसकी गर्दन को चूमने लगा और चूची को मसलने लगा। नीरू ने किताब पलंग पर इस तरह रखी थी कि हम दोनों पढ़ सकते थे।

किताब की पहली लाईन पढ़कर नीरू बोली कि बेटा क्या अपनी माँ को चोदोगे? साले तुझे शर्म नहीं आयेगी अपनी माँ को चोदते वक्त? माँ को चोदने वाले को मादरचोद कहते है। क्या तू मादरचोद बनेगा बेटा? मैंने भाभी की गर्दन को काट खाया और पढ़कर अपना डायलॉग बोला कि माँ तू इतनी कामुक हो कि में अपने आपको रोक नहीं सकूँगा। तुझे देखकर मुझे पापा से जलन हो रही है कि मुझे तेरा बेटा बनना पड़ा है। तेरी चूत जिसमे से में पैदा हुआ हूँ.. वो तो चोदने के लिये बनी है.. हाँ माँ में मादरचोद बनूँगा.. तुझे पापा से अधिक आनंद दूँगा.. भाभी बोली कि अच्छा बेटा चोद लेना अपनी माँ को.. पहले मेरी चूची तो चूसो.. जिस तरह बचपन में चूसते थे। बेटा तेरा लंड मेरे चूतड़ की दरार में चुभ रहा है। क्या माँ की गांड मारोगे.. तभी दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आई और पीछे पलटकर देखा.. तो सुजाता देवी खड़ी थी। माँ ने कोई कपड़ा नहीं पहना था.. माँ की जांघों के बीच छोटी छोटी काली झांटे थी और उसकी मस्त छोटी चूची खड़ी थी। माँ ने अपनी चूत पर हाथ रगड़ते हुये मुझे देखा और बोली कि राजू अपनी भाभी को चोदकर तुमने आधी मुश्किल तो हल कर दी है.. अब बाकी की भी हल कर दो। अपनी माँ की प्यासी चूत को भी खुश कर दो। बहुत तड़पी है मेरी चूत जवान लंड के लिये। जब से तेरा लंड नीरू की चूत में घुसते हुये देखा है.. में चैन से नहीं बैठ पाई.. तेरा लंड तेरे बाप की याद दिलाता है।

अपनी भाभी को चोदकर तुम आधे मादरचोद बने थे.. अब मुझे चोदकर पूरे बन जाओ और हम तीनों घर में चुदाई के पार्ट्नर बन जाये और तेरे लिये इस घर में गंगा के साथ जमुना भी बहेगी। भाभी के साथ माँ भी चुदवायेंगी तुझसे। मेरे राजा में समझ गया कि अब सारी बात खुल चुकी है और शरमाने की कोई ज़रूरत नहीं है। फिर मैंने सुजाता को पलंग पर नीरू के साथ ही पटक दिया और माँ को चूमने लगा। नीरू तुम माँ की चूत को चाटो और उसकी गांड को सहलाओ। आज से हम चुदक्कड़ परिवार है.. राजू आज से तू चोदू देवर और मादरचोद बेटा है। जिस चूत से में निकला हूँ.. उसी चूत को चोदकर में अपनी माँ की आग ठंडी करूँगा और आज से तुम दोनों के लिये घर का मर्द बनकर रहूँगा। क्यों माँ तुझे अपना बेटा एक मर्द के रूप में स्वीकार है? मैंने कहते ही माँ की चूची को ज़ोर से भींच लिया और उसके बूब्स को मुँह में डालकर चूसना शुरू कर दिया। हाँ बेटा तेरा लंड पाकर मेरी चूत धन्य हो जायेगी.. नीरू बेटी तो मेरी बहू ही रहेगी.. चाहे उसको सुभाष चोदे या फिर तू। मुझे चोदकर अपना बना लो बेटा और घर की इज़्ज़त को घर में ही संभाल लो मेरे राजा। ऊपर से में सुजाता की चूची चूसने लगा और नीचे से भाभी माँ की चूत चाट रही थी। मेरी माँ का बदन गर्म हो चुका था और वो चुदाई के लिये तड़प तड़प कर उछल रही थी। बेटा अब देर मत करो.. इस चूत को चोद डालो। बहु तुम तो अपनी आग बुझा चुकी हो.. मुझे भी शांत हो जाने दो। मुझे भी इस गधे के लंड से चुद जाने दो.. बेटा कैसे चोदोगे अपनी माँ को? किस स्टाईल में चोदोगे राजा.. मेरी चूत से लार टपक रही है.. एक कुत्तिया की तरह चोदो। फिर मैंने हंसते हुये कहा कि माँ तुम अपने आपको कुत्तिया बता रही हो.. तो फिर क्यों ना में तुझे कुत्तिया की तरह ही चोद लूँ।

तुम अपने घुटनों और कोहनी के बल खड़ी हो जाओ और में तुझे पीछे से कुत्ते की तरह चोदूंगा। तुम मेरी कुत्तिया बनोगी ना? माँ कुत्तिया बन गई और उसने अपनी गांड ऊपर उठा ली.. सुजाता के गोरे गोरे चूतड़ बहुत मादक थे। मुझे उसकी गांड पर इतना प्यार आया कि मैंने उसकी गांड को चूम लिया और उसकी गांड को कुत्ते की तरह सूंघने लगा। नीरू ने मेरे लंड को चूसा और जब मेरा लंड उसके थूक से भीग गया.. तो मैंने माँ के पीछे पोज़िशन ले ली। भाभी ने मेरे लंड का निशाना सुजाता की चूत पर लगाया और बोली कि शाबाश देवर राजा.. चोद डालो अपने दूसरे शिकार को। नीरू के बाद सुजाता को अपनी रंडी बना लो चोद लो अपनी कुत्तिया को। ऐसा लंड इसको कई सालों से नहीं मिला है.. अपने मूसल लंड को पेल दो इस छिनाल की प्यासी चूत में। फिर मैंने अपना लंड एक ही धक्के में सुजाता की चूत में पेल दिया और उसके चूतड़ को ज़ोर से चांटा मार दिया। सुजाता सिसकारी ले उठी.. ओह्ह राजा धीरे से.. बहुत मोटा है तेरा। में तो लंड का स्वाद ही भूल चुकी थी.. आराम से बहु मेरी चूची चूसो.. पेलो बेटा बहुत मज़ा आ रहा है। चोदो अपनी माँ को, बहुत मस्त हो चुकी हूँ.. चोद उस चूत को जिसने तुझे जन्म दिया है.. फाड़ दे मेरी चूत को। में मरी उईई माँ आआअहह और सुजाता पागलों की तरह बोले जा रही थी और में जानवरो की तरह उसको चोद रहा था।

फिर भाभी हम दोनों को पागलों की तरह चूम रही थी और काट रही थी और मेरे अंडकोष से खेल रही थी। नीरू भी कुछ बोल रही थी.. सुजाता को चोद लो राजू.. इसको लंड की ज़रूरत है। हम दोनों को लंड चाहिये तेरा। मेरे राजा चोदो माँ को.. उधर सुजाता झड़ रही थी.. उसको सांस मुश्किल से आ रही थी। मेरा लंड अब सुपरफास्ट ट्रेन का पिस्टन बन चुका था और मेरा लावा भी छूट पड़ा। मेरा लंड रस सुजाता की चूत में गिरने लगा और उसकी गांड से होता हुआ जाघों से नीचे जाने लगा.. सुजाता भी थकी हुई कुतिया की तरह झड़कर हाँफ रही थी। नीरू मुस्कुरा कर बोली कि ये होती है घरेलू चुदाई और उसका मज़ा भी अलग ही होता है ।।

धन्यवाद …

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