बीवी ने अपनी सहेली को चुदवाया 1

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Antarvasna रीता मेरी पड़ोसन थी। मेरी पत्नी नेहा से उसकी अच्छी दोस्ती थी। शाम को अक्सर वो दोनों खूब बतियाती थी। दोनों एक दूसरे के पतियों के बारे में कह सुनकर खिलखिला कर हंसती थी। मुझे भी रीता बहुत अच्छी लगती थी। मैं अक्सर अपनी खिड़की से उसे झांक कर देखा करता था। उसके कंटीले नयन, मेरे को चीर जाते थे। उसकी बड़ी बड़ी आंखें जैसे शराब के मस्त कटोरे हों। उसका मेरी तरफ़ देख कर पलक झपकाना मेरे दिल में कई तीर चला देता था। वो सामने आंगन में जब बैठ कर कपड़े धोती थी तो उसके सुन्दर वक्ष ऐसे झूलते थे … मेरा मन उसे मसलने के लिये उतावला हो उठता था। पेटिकोट में उसके लचकते चूतड़ बरबस ही मेरा लण्ड खड़ा कर देते थे। पर वो मुझे बस मुस्करा कर ही देखती थी… अकेले में कभी भी घर नहीं आती थी।
नेहा सुबह ही स्कूल चली जाती थी… मैं दस बजे खाना खाकर ही दफ़्तर जाता था।
एक बार रीता ने नेहा को सवेरे स्कूल जाते समय रोककर कुछ कहा और दोनों मेरी तरफ़ देख कर बाते करने लगी। फिर नेहा चली गई। उसके जाने के कुछ ही देर बाद मैंने रीता को अपने घर में देखा। मेरी आंखें उसे देख कर चकाचौंध हो गई। जैसे कोई रूप की देवी आंगन में उतर आई हो… वो बहुत मेक अप करके आई थी। उसका अंग अंग जैसे रूप की वर्षा कर रहा था। उसके उठे हुये गोरे-गोरे चमकते हुये बाहर झांकते हुये उभरे हुये वक्ष जैसे बिजलियां गिरा रहे थे।
उसका सुन्दर गोल गोरा चिकना चेहरा … निगाहें डालते ही जैसे फ़िसल पड़ी।
“र्…र्…रीता जी ! आप … ?”
“मुझे अन्दर आने को नहीं कहेंगे?”
“ओ … हां … जी हां … आईये ना … स्वागत है इस घर में आपका !!!”
“जी, मुझे तो बस एक कटोरी शक्कर चाहिये … घर में खत्म हो गई है।” उसके सुन्दर चेहरे पर मुस्कराहट तैर गई। मेरी सांसें जैसे तेज हो गई थी। वो भी कुछ नर्वस सी हो गई थी।
“बला की खूबसूरत हो…!”
“जी !… आपने कुछ कहा …?”
मैं हड़बड़ा गया … मैं जल्दी से अन्दर गया और अपनी सांसें नियंत्रित करने लगा। यह पहली बार इस तरह आई है , क्या करूँ …!!!”
मैंने कटोरी उठाई और हड़बड़ाहट में शक्कर की जगह नमक भर दिया। मैं बाहर आया…
मुझे देख कर उसे हंसी आ गई… और जोर से खिलखिला उठी।
“जीजू ! चाय में नमक नहीं… शक्कर डालते हैं … यह तो नमक है…!”
“अरे यह क्या ले आया … मैं फिर से अन्दर गया, वो भी मेरे पीछे पीछे आ गई …
“वो रही शक्कर …” उसके नमक को नमक के बर्तन में डाल दिया और शक्कर भर ली।
“धन्यवाद जीजू … ब्याज समेत वापस कर दूंगी !”
और वो इठला कर चल दी…
“बाप रे … क्या चीज़ है …!”
उसने पीछे मुड़ कर कहा,”क्या कहा जीजू… मैंने सुना नहीं…!”

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