और प्यार हो गया

ही फ्रेंड्स, मेरा नाम है अरमान.. मेरी उमर 22 है. ये कहानी है आज से दो साल पहले की जब मैं अपनी मौसी के घर पे छुट्टियों पे गया था. कुछ भी हो लेकिन मौसी यानि की अपनी आंटी की मूहबोली बहन होती है. और उन्हीं के बेटी से ये सब करना अच्छा नहीं है पर भाई जब लंड महाराज उठ जाते है तो वो किसी के बारे में नहीं सोचते. यही मेरे साथ हुआ. मेरी मौसी की तीन लड़कियां है, सबसे बड़ी निशा, दूसरी हेमलता, और तीसरी गौरी.. और प्यार हो गया –

सबकी सब मुझसे सिर्फ़ एक या दो साल बड़ी. मेरी मौसी के वहां गर्मी में सब लोग बाहर आँगन में सोते है, तो उस वक्त हम सब भी बाहर सोए हुए थे, एक और हेमलता और दूसरी और गौरी और निशा सोई हुई थी, मैं आ गया था बीच में,. यानि की मैं बीच में सो रहा था.हम सब की खटिया एकऔरदूसरे से एकदम लगी हुई थी. एक दो दिन तो ऐसे ही बीत गये, तब तो मैंने अपनी मौसी की किसी भी लड़की को ऐसे बुरी नज़र से देखा तक नहीं था, लेकिन एक रात को क्या हुआ..करीब रात के दो या तीन बजे थे की गौरी का हाथ मेरे हाथ पे आ गिरा.मैंने सोचा शायद नींद में आ गया होगा तो मैंने उठा के वापस रख दिया. थोड़ी देर बाद फिर से उसका हाथ मेरे हाथ पे आ गया तो मैंने फिर से वापस रख दिया.. लेकिन इस बार तो हद ही हो गई यार गौरी ने सीधे ही मेरा हाथ पकड़ लिया और मेरे हाथ पे अपना हाथ फिरने लगी. अब भाई कुछ भी हो लेकिन यार आख़िर में मैं भी तो एक मर्द ही हूँ ना..

मुझे भी मजा आ रहा था तो मैंने भी उसका साथ देना शुरू कर दिया. अब हम दोनों एक दूसरे के हाथ चूम रहे थे. लेकिन सब आजू बाजू में सो रहे थे.उसने अपना हाथ मेरे लंड पे रख दिया और उसे दबाने लगी, मैं भी अपना हाथ उसके बूब्स पे लगाकर दबनेलागा, वो सिसकियां भरने लगी लेकिन सबके जगह जाने की वजह से हम थोड़े डरे हुए थे. उस रात तो बस उतना ही हुआ. दूसरी रात भी वही हुआअब मैं उसे चोदना चाहता था, तो रात को जब दो बजे तो मैं उठा और पेशाब करने के लिए गया और उसे भी इसारा कर दिया तो गौरी भी मेरे पीछे आ गई. जैसे ही वो बाथरूम में आई मैंने उसे पकड़ लिया और हम एक दूसरे को किस करने लगे.. वो तो जैसे मर ही रही थी वैसे लगातार मुझे चूम रही थी मैं भी उसे पागलों की तरह चूम रहा था, उसने मेरा लंड पकड़ लिया और ज़ोर से उसे दबाने लगी मुझे दर्द हो रहा था लेकिन मजा भी आ रहा था.

अब मैंने देर ना करते हुए उसकी सलवार का नाडा खोल दिया और उसे वही बाथरूम में ही घोड़ी बना दिया और सीधा लंड पेल दिया उसकी चुट्त में, उसने तो साली ने पहले चुदवाया हुआ ही था तो कोई दिक्कत ना होते लंड महाराज सीधे ही सिंघासन पे सवार हो गये, 15-20 मिनट बाद हम अपने अपने बाद पे जा कर सो गये.. मैं वहां 12 दिन रुका लेकिन हर रोज मैंने उसे चोदा.. लेकिन यारो ये चुदाई और ये लड़की में मुझे कोई इंटेरेस्ट नहीं था क्योंकि ऊपर वाले को तो कुछ और ही मंजूर था,और प्यार हो गया –

दो तीन महीने बाद मैं फिर से मौसे की वहां गया, इस बार भी वैसे ही घर में सब के बेड लगे हुए थे, मैं बीच वाले में सो गया, गौरी मेरी एक तरफ और एक तरफ हेमलता, मैंने हेलमटा को कभी इस नज़र से नहीं देखा था, रात हुई की गौरी शुरू हो गई, हमारा कम हो गया हम सो गये. लेकिन दूसरी रात जब गौरी नहीं उठी तो मेरी आँख खुल गई और मैंने गौरी की और देखा लेकिन वो तो सो रही थी, मैं घूम गया, लेकिन जैसे ही घुमा मेरे सामने हेमलता थी, एकदम पड़ी जैसी, दूध जैसे सफेद, काले बॉल, गुलाबी होंठ.. आ क्या लग रही थी.. सच काहु तो दोस्तों मुझे उससे उसी वक्त प्यार हो गया और दिल ने उसे ही रानी बनाना चाहा. मैंने धीरे से अपना हाथ उसके हाथ पे रख दिया वो नींद में थी तो उसे कोई फर्क ना पड़ा.

मैंने थोड़ी देर बाद हिम्मत करते हुए अपना हाथ उसके पेट पे रख दिया वो थोड़ी हिली.मैंने अपना हाथ वापस ले लिया और बाद में थोड़े टाइम के बाद फिर से रखा, थोड़ा ऊपर करते हुए उसके बूब्स पे जैसे ही हाथ रखा के उसने मेरा हाथ हटा दिया. मतलब की वो जगह रही थी, थोड़ी देर बाद मैंने फिर से अपना हाथ उसके हाथ पे रखा तो उसने अपना नाखून मेरे हाथ पे गाड़ दिया. तो मैंने ज़ोर से अपना हाथ खटिया से टकराया और घूम के रोने का नाटक करने लगा तो थोड़ी देर बाद उसने मुझे उसकी और घूमने के लिए हाथ से घूमने की कोशिश की पर मैं नहीं घुमा. कुछ वक्त के बाद मैं घुमा तो उसकी आंखों में आँसू थे.मैंने उसे साफ किया और सॉरी कहा. बाद में मैं उसका हाथ अपने हाथ में लेकर सो गया लेकिन उसकी आंटी यानि की मेरी मौसी सुबह जल्दी उठ जाती है तो हम ठीक से सो गये.. दूसरे दिन उसने रात के लिए मुझे बहुत दांता और ये सब करने से मना कर दिया, लेकिन मैं कहा सुधारने वाला था,

मैंने फिर से रात में उसका हाथ पकड़ लिया और उसपर किस करने लगा. वो मना करने लगी. लेकिन मैंने उसकी एक ना सुनी. मैं उसके बूब्स दबाने लगा कभी कमर पे हाथ रखता तो कभी पुसी पे.. दो तीन दिन ये चलता रहा और जब मैं अपने घर चला गया तो दो महीनों बाद एक फोन आया जो की हेमलता का था, और वो इसलिए की उसे मेरी याद आ रही थी मतलब की वो मुझसे प्यार करने लगी थी.अब तो मैं भी उससे बहुत प्यार करने लगा था, हम दोनों रात रात भर बातें किया करते. लेकिन मिलना कभी नहीं होता था, एक साल बाद हम दोनों मिले, उसको देखते ही मेरी आंखें बरसने लगी और वो मुझसे लिपटके ज़ोर ज़ोर से रोने लगी. हम दोनों एक दूसरे से लिपट गये. लेकिन वो मुलाकात भी सिर्फ़ एक दिन की ही थी. फिर शाम को मैं मैं चला आया. बाद में मैं पढ़ाई के लिए बाहर चला गया लेकिन जहां मैं गया था उसी शहर में हेमलता की मामा यानि की हमारे मामा रहते थे, तो वो कुछ दीनों के लिए मामा के घर पे रहने आई थी, एक दिन मैं भी चला गया मामा के वहां, उसी दिन मामा के पूरे परिवार को दो दीनों के लिए कही बाहर जाना था तो वो सब हम दोनों को घर पे रखकर चले गये. अब तो सिर्फ़ वो और मैं अकेले.. और प्यार हो गया –

और जब एक अकेली लड़की और एक अकेला लड़का मिलता है तो कोई ना कोई तो नयी स्टोरी बनती ही है..मामा के जाते ही हम लिपट गये एक दूसरे को बेइंतहा मोहब्बत करने लगे वो मुझे पूरे चेहरे पे किस करने लगी, मैं भी उसका साथ दे रहा था, अब हम दोनों पे सेक्स का नशा छा रहा था, मैंने उसे मामा के बेड पे सुला दिया और उसे चूमने लगा, अब मैंने उसका टॉप निकल दिया, वो शर्मा रही थी, सलवार भी उतार दी तो वो टाँगे सिकुड़ने लगी. मैं उसके ऊपर चढ़ते हुए उसे लिप्स किस करने लगा तो वो नॉर्मल हो गयी और मेरा साथ देने लगी. मैं एक हाथ से उसकी चुट्त पे अपनी उंगलियां घुमा रहा था तो दूसरे हाथ से उसके बूब्स दबा रहा था, मैंने धीरे से अपनी एक उंगली उसकी गीली चुट्त पे फिरा दी तो वो एकदम से चौंक गयी.. उसकी ब्रा और पेंटी निकली तो बॉस क्या लग रही थी वो.. जैसे आसमान से पड़ी उतार आई हो.

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