ओला ड्राइवर के साथ सेक्स के मज़े

हेलो दोस्तों, लोग ड्राइवर की नौकरी को बहुत अच्छा नहीं मानते है, लेकिन लोग ये नहीं जानते; की ड्राइवर सबसे ज्यादा मजे लेता है. अगर मालकिन खूबसूरत हो ओर उसकी खूबसूरत बेटी हो या उसकी सहेलिया हो…तो ड्राइवर उन सबकी खूबसूरती का रसपान करता है. दोस्तों, मेरा नाम राजू है ओर में एक बारे सेठ के लिए काम करता हूँ. उसकी बीवी तो काफी पहले मर चुकी है, लेकिन उनकी एक बहुत खूबसूरत बेटी ओर वो कॉलेज में पड़ती है ओर मेरी ड्यूटी उसकी सेवा में है. में सही मायने में उसकी सेवा करता हूँ. वो जब भी मुझे बुलाती है, मुझे उसके पास जाना पड़ता है ओर उसकी चुत ओर गान्ड बजा कर उसकी सेवा करनी पड़ती है. वैसे मेरा सेठ भी आशिसक मिज़ाज़ है ओर वो गाड़ी में अक्सर नयी-नयी लड़कियों के साथ आता है ओर उनके साथ खेलता है..कभी-कभी तो वो सुनसान सदका का फायदा उठाते हुए, लड़कियों की कार में ही चुदाई कर देता है ओर में बाहर खड़े होकर पहेरा देता हूँ. ये बताने की जरूरत नहीं है, की में सेठ ओर उनकी बेटी दोनों से बातें छिपाने के लिए मोटे पैसे वसूलता हूँ.

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गर्लफ्रेंड की पहली चुदाई

बात उस टाइम की है जब मैं 2न्ड एअर एंगग में था आज से चार साल पहले मैं जहां मेरी टुटीओन्स के लिए जाता था वहां पास 12त के स्टूडेंट्स के भी टुटीओन्स होते थे वो लड़की वहां आती थी उस वक्त वो 18 की थी उसका नाम इशिका था माल थी दोस्तों फिगर 32-28-32 था बस मुझे भा गयी मैं बस उसके पीछे जाने लगा वो भी मुझे देख कर अनदेखा करने लगी 10 दिन बाद मैंने उससे प्रपोज़ किया एक ग्रीटिंग देकर मैंने उसपर अपना सेल नंबर लिखा था अगले दिन उसका फोन आया की वो भी मुझे पसंद करती थी बस मुझसे पहल चाहती थी.

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रानी सन्ग होली बनाई

आप साबो ने मेरी पहली सच्ची कहानी तो पढ़ ही ली होगी जिसमें मैंने बताया था की मैंने कैसे अपनी ममेरी दोस्त टीना की वर्जिन चुत की चुदाई करके लहू लुहन कर दिया था. अब मैं आपको बताने जा रहा हूँ की कैसे मैंने अपनी सगी दोस्त रानी दोस्तऔर की चुत का सील थोड़ा. दरअसल में मेरी दोस्त मुझसे करीब दो साल बड़ी थी और काफी गोरी चिट्ठी थी. हाइट थोड़ी कम थी लेकिन शरीर एकदम गठीला था. चुचियाँ ऐसी थी मानो सूट को फड़कर बाहर निकल जाएगी. उसे देखने के बाद अच्छे अच्छे का दिमाग खराब हो जाने वाला फिगर था उसका. चूतड़ भी बिलकुल मस्त. जब चलती थी तो मानो राहगीरों का लंड पर तूफान आ जाता होगा लेकिन मेरी दोस्त रानी थी बहुत शर्मीली. कभी किसी से बात तक नहीं करती थी किसी लड़कों के तरफ देखना तो बहुत दूर की बात थी. कॉलेज में भी वो लड़के से बात तक नहीं करती थी हालाँकि लड़के उसे चोदने के लिए आहें भरते रहते थे. अब मैं सीधा कहानी पर आता हूँ. मेरी दोस्त रानी ,मैं और मेरे आंटी पिताजी यही मेरा परिवार था लेकिन एक ममेरी दोस्त टीना भी आकर हमलोगो के साथ ही रहती थी. जैसा की मैं पिछली कहानी में बताया था की टीना मेरे घर पर करीब एक साल रही थी और लगभग रोज चुदवाती थी.ये बात मेरी दोस्त रानी को किसी तरह पता चल गया था शायद वो मुझे टीना को चोदते हुए देख ली थी.होली की छुट्टी में टीना अपने घर चली गयी थी इसलिए रानी दोस्त मेरे साथ सोने आ गयी.होली में कई दिन पहले से लोग होली का गीत ढोलक बजा बजा कर गाने लगते है . गीतों में चोदने चुदवाने की बातें खुलेआम होती है. रानी सन्ग होली बनाई

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गीतू की चुदाई बातरूम मे

हेलो दोस्तों मेरा नाम हर्ष हे और मैं एक पंजाबी लड़का हूँ..हाइट 5-11″ है..ये मेरी फर्स्ट स्टोरी हे उम्मीद करता हूँ आप लोगों को जरूर पसंद आएगी.मैं भी अपना एक्सपीरियेन्स शो करना चाहता हूँ की मैंने कैसे अपनी मूहबोली बहन को चोद दिया..तो अब कहानी पे आते हैं दोस्तों….मेरे परिवार मैं मेरे आंटी अंकल और एक छोटी मुह बोली बहन गीतू आगे 19 हाइट 5-7″ फिगर साइज 32-28-34 हे..उसका फिगर और रंग देख के कोई भी लंड पानी निकल दे..गीतू का फेस रिया सीन की तरह हे..मेरी उम्र 21 हे और गीतू मुझसे 2 एअर छोटी हे..तो दोस्तों बात पिछले साल दीवाली की हे..हम दीवाली की तैयारी में जुटे थे अंकल का एक्सपोर्ट इम्पोर्ट का बुसिनस्स हे सो वो ज्यादातर बाहर रहते हैं..मैं बी.कॉम फाइनल एअर में हूँ और गीतू बी.कॉम फर्स्ट एअर में हे.वो मुझसे हेल्प लेटी हे क्योंकि हम दोनों के सब्जेक्ट भी सेम हैं.
मेरे मान में कभी उसके लिए गलत ख्याल नहीं आया..दीवाली से 3 दिन पहले घर पे रंग का काम चल रहा था हम दोनों एक कमरे में बैठकर टीवी देख रहे थे और आंटी किचन में काम कर रही थी..मैंने गीतू से एक गिलास पानी माँगा वो पानी लायके जैसे आई उसकी नज़र त.भी की तरफ थी और मुझे पानी देते हुए उसके हाथ से गिलास मेरी पैंट पे गिर गया और आगे का हिस्सा गीला हो गया..गीतू हँसने लगी मुझे बहुत गुस्सा आया मैंने भी एक गिलास पानी ला कर उसके अगले हिस्से में गिरा दिया..और बाथरूम की तरफ जाने लगा..गीतू को पता नहीं क्या हुआ वो भी जल्दी से बाथरूम में घुस गयी और बाल्टी पानी की भारी मुझपर गिरा दी और भागने लगी मैंने उसको पीछे से पकड़ लिया और भागने नहीं दिया..मैं भी उसे भिगाना चाहता था ..
पर वो मुझसे पकड़ी नहीं जा रही थी मैंने उसे साइड में गिरा के जल्दी से बाथरूम बंद कर दिया अंदर से और बाल्टी एक हाथ से भरने लगा और एक हाथ से उसे पकड़ने लगा.मैंने उसका पेंट पकड़ लिया पीछे से पर उसने छूटने की कोशिश इतनी की की मेरे हाथ से उसका सलवार का नाडा टूट गया और सलवार नीचे गिर गयी वो अपने दोनों हाथों से सलवार उठाने लगी मैंने ये देख के उसे चोद दिया की मेरी बहन हे इतना मज़ाक बहुत हे पर मैं जैसे ही उसकी तरफ मुड़ा उसने एक थप्पड़ मेरे मुंह पे मर दिया मुझे इतना गुस्सा आया मैंने कहा की क्यों मारा तो उसने कहा तूने मेरे सलवार का नाडा तोड़ दिया अभी देखो मैं क्या करती हूँ इतना कहते ही वो मुझपर टूट पड़ी और मेरी पैंट की हुक तोड़ दी और मेरी पैंट नीचे गिर गयी और मैंने नीचे आंडरवेयर नहीं पहन रखी थी मेरा 6 इंच का लंड उसके सामने हो गया वो एकदम से देखकर मुंह फेयर लिया तो मुझे इतना गुस्सा आया मैंने उसका सूट पीछे से पकड़ के फाड़ दिया..
मेरा दिमाग घूम गया उसने भी पैंटी नहीं पहन रखी थी और उसकी बड़ी सी गोरी गांड मेरे सामने थी मैंने पहली बार किसी लड़की को नंगा देखा था पर वो भी अपनी बहन को..गीतू कहने लगी की प्ल्स भैया तुम मत देखो इधर तो मुझको पता नहीं क्या हुआ मैंने अपनी शर्ट उतार के पूरा नंगा हो गया और उसको पीछे से पकड़ लिया और पीठ पे उसके किस करने लगा और भूल गया मेरी बहन हे..गीतू चिल्लाने लगी तो मैंने उसके मुंह हाथ से दबा दिया..और एक हाथ से गांड मसलने लगा..और गीतू के कान में धीरे से कहने लगा गीतू प्ल्स मैं पागल हो गया हूँ मुझे करने दो और उसे अपनी तरफ पलटा लिया और इससे पहले वो चिल्लाती अपने होंठ उसके होंठ पे रख के दबा लिए और चूसने लगा..और अपने दोनों हाथ उसकी चूची पे रखकर ब्रा के उप्पर से मसलने लगा.क्या बता दम दोस्तों इतना मजा आ रहा था इतने सॉफ्ट चुचियों को मसलने में वो गु गु की आवाज़ कर रही थी और मैंने उसके ब्रा की तनी को खोल के एक हाथ से मुंह दबा के अपने होंठ उसकी निप्पल पे रख के चूसने लगा एक एक करके..अब वो भी गरम हो रही थी उसे भी शायद मजा आने लगा था जो आवाज़ सिसकियों में बदल गयी और मेरे हेयर पे हाथ फेरने लगी और सर मेरा अपनी चुचियों पे दबाने लगी..मैंने अपना हाथ उसके मुंह से हटा लिया और वो धीरे धीरे बोल रही थी आह भैया ये क्या कर रहे हो मर जौंगिइइ माइ.. उईईई माँ अहह…मैंने अब उसको दीवार के सहारे खड़ा करके उसकी फुड्डी पे हाथ फेरने लगा उसकी फुड्डी हेरी थी शायद उसके साफ नहीं किए थे.
मैंने एक उंगली फुड्डी में डालने लगा उसकी फुड्डी गीली हो चुकी थी मैं कंटिन्यू उसकी चूची चूसे जा रहा था..उंगली अंदर घुस गयी पूरी और अंदर बाहर करने लगा.जैसे उंगली अंदर जाती वो उचक जा रही थी उप्पर को थोड़ा..और मुझे कस लेटी..आ चुसू भैया प्लीज़ बहुत अच्छा लग रहाआ हे अंमुहह आह आह…मैंने अब उसकी एक तंग उप्पर की और फुड्डी को थोड़ा फैला के जीभ अपनी उसके रखकर चूसने लगा वो तो मानो पागल हो गयी और अपनी गांड का पूरा भर मुंह में मेरे डाल रही थी मैं चुसाई कर रहा था भैया चूसो आह मैं मर जाऊंगी कितना मजा आ रहा हे क्या आग लगा रहे हो भैयाअ उईईइ माआआः सक इट..अब मैंने कहा की तुम मेरा लंड चूसो तब तुम्हें इससे भी ज्यादा मजा दूँगा वो जल्दी से बैठ गयी और मेरा लंड पकड़ के मुंह में भर लिया और पूरा सूपड़ा अंदर बाहर कर रही थी मुझे बहुत मजा आ रहा था..आह गीतू मेरी जान अपने भाई का लंड चूस लो आह आह आह मजा दे दो अपने भाई को पाँच पाँच की आवाज़ करके गीतू लंड मेरा चूस रही थी..
मैंने कहा अब रहने दो मैं अब तुम्हारी चुदाई करूँगा अपना लंड तुम्हारी फुड्डी में डालकर जन्नत में फुँछौँगा और उसे डॉगी स्टाइल में कर दिया और पीछे से लंड अपना रगड़ने लगा उसकी गान्ड इतनी मोटी थी मेरा मान गान्ड मारने का हुआ पर बात बिगड़ ना जाए इसलिए मैंने अपना लंड उसकी फुड्डी पे टीका के एक शॉर्ट मारा अंदर को उसके मुंह से उईईईईईईईईईईईईईई माआआआ मर गयी बाहर निकालो मैं मर जाऊंगी चीख निकल गयी मैंने एकदम मुंह उसका दबा दिया…उसके आँसू गिरने लगे उसकी सील टूट गयी थी और खून लंड पे से टपकने लगा मैं थोड़ा रुक गया जब उसे थोड़ा रिलॅक्स मिला तो मैंने पूरी ताक़त से कस के झटका मारा पाँच से आवाज़ करके पूरा लंड फुड्डी की झड़ तक घुस गया..वो छटपटाने लगी मैं धीरे धीरे लंड अंदर बाहर करने लगा थोड़ी देर बाद उसे मजा आने लगा और वो अपनी गान्ड पीछे की तरफ दबा कर ये सिग्नल दिया की मैं अब तैयार हूँ.तो मैंने अपनी लंड के झटकों की बढ़ता बड़ा दी वो आह आह आह आह हें हाईए चोद लो तीज मरो चोदा चोदा प्लीई मजा आ रहा हे करने लगी मैं पूरी बढ़ता के साथ लंड पेल रहा था बाथरूम में फॅट फटत्त की आवाज़ आ रही थी..15 मिनट ्चोद्ने के बाद वो 3 बार पानी शॉड चुकी थी और अब मैं भी झड़ने वाला था और 4-5 तेज तेज झटकों के साथ मैं भी झाड़ गया उसकी फुड्डी में ही…
फिर वो खड़ी होकर मुझे हग करने लगी कहने लगी भैया ये बात किसी को पता नहीं चलनी चाहिए.जब भी आप चाहोगी मैं चुदाई करवने के लिए तैयार हूँ..तो मैंने कहा तुम्हारी गांड बड़ी मोटी और मस्त हे तो गीतू मुस्करा के कहने लगी भैया तुम्हारी हे हे..और हम दोनों फिर बाथरूम से अपने अपने कमरे आ गये नहाकर..कैसी लगी मेरी कहानी दोस्तों वोट जरूर करना..अगर कोई आ आंटी भाभी या लड़की मुझसे चुदवाना चाहे तो मुझे मैल करे..मैल दोस्तों अगले पार्ट में ब्टौँगा की कैसे मैंने गीतू की मोटी गोरी गांड मारी..
Gitu Ki Chudai Bathroom Me

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और प्यार हो गया

ही फ्रेंड्स, मेरा नाम है अरमान.. मेरी उमर 22 है. ये कहानी है आज से दो साल पहले की जब मैं अपनी मौसी के घर पे छुट्टियों पे गया था. कुछ भी हो लेकिन मौसी यानि की अपनी आंटी की मूहबोली बहन होती है. और उन्हीं के बेटी से ये सब करना अच्छा नहीं है पर भाई जब लंड महाराज उठ जाते है तो वो किसी के बारे में नहीं सोचते. यही मेरे साथ हुआ. मेरी मौसी की तीन लड़कियां है, सबसे बड़ी निशा, दूसरी हेमलता, और तीसरी गौरी.. और प्यार हो गया –

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कुँवारी कविता भाभी की प्यास भुज़ाई

मेरी कविता भाभी जब मेरे घर शादी हो कर के आई तो मेरी उमर 18 साल थी. मेरे भैया की उमर तब 40 साल थी और कविता भाभी की उमर 20 साल थी. अब आप समझ सकते हैं की दूनी उमर वाला हज़्बेंड क्या छोड़ेगा किसी जवान लड़की को. मैं तो पहले दिन से ही भाभी को लाइन मारना शुरू कर दिया था. कुच्छ ही दीनों बाद भैया का ट्रांसफर मुंबई से गोवा हो गया, वो अक्सर गोवा जाते तो उधर ही रुक जाते. देसी भाभी जवान थी मेरी, उसको चुत में अक्सर खुजली होती थी. मैंने भाभी के रूम में डिल्डो भी रखा देखा था.

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Antarvasna Hindi Sex Stories मकड़जाल 11

मुन्ना~: मैं दावे से कह सकता हूँ सर….वो लोग इस दुनिया में नहीं है….सबका मर्डर हो चुका है…?
दोष~: खुल कर बताओ.
मुन्ना ने जितना पता लगाया था सब दोष को बता दिया.
दोष~: ह्म्‍म्म्मम……तो फिर आगे क्या करोगे…?
मुन्ना~: सारे फ़साद की झड़ वो सबूत है…जिसके लिए इतना बड़ा कांड हुआ….आख़िर क्या था उस सबूत में….यही जाने की कोशिश कर रहा हूँ….इस केस में बॉन्ड की भी मदद ले रहा हूँ…!
दोष~: बॉन्ड को मेरा थेन्कस कहना.
मुन्ना~; इसे सर ..कह दूँगा.
दोष~: सिंग….ये मामला बड़ा नाज़ुक है….इसे ज़रा केयरफुल हैंडिल करना…..एक गलती का ख़ामियाजा महँगा पड़ सकता है…
मुन्ना~: मैं जनता हूँ सर…पर एक बात में दावे से कह सकता हूँ…
दोष~: क्या…?
मुन्ना~: ये केस पहली नज़र में जो नज़र आता है है इतना सीधा है नहीं…
दोष~: फिर….?
मुन्ना~: सर कोई गहरा पहलू है जो अब तक छिपा है….एक धमाकेदार पहलू…जिसके खुलते ही सब बदल जाएगा…
दोष~: तुम्हें ऐसा क्यों लगा…?
मुन्ना~: आप ही सोचिए सर….क्या उनका कत्ल करना जरूरी था…जबकि सारा पावर जज के हाथ में था….पता चला है की क्षसे दबा दिया था….केस खत्म ही होने वाला था की तभी ये सबूत प्रकट हुआ….
आप ही सोचिए….ये सबूत क्या था…..एक वीडियो फुटेज….पक्का तो नहीं कह सकता हूँ सर….पर पूछताच्छ में भी यही पता चला है….
दोष~: कहते रहो सिंग….?
मुन्ना~: मना सर की संयोग से सबूत मिस्टर. ठाकुर के हाथ लग गया……क्या उस सबूत के लिए सबको गायब करके मारना जरूर था…..चलो मना जरूरी था….तो अगर देखा जाए तो इस केस से जुड़ा हर आदमी सजा पा चुका है….यहाँ तक की जो इंस्पेक्टर. मनिराम इस केस की पड़ताल कर रहा था…वो भी सजा पा चुका है….
इतना कहकर मुन्ना ने एक लंबी साँस भारी…..फिर बोला.
मुन्ना~: फिर ये मामला इतना टूल क्यों पदक रहा है…क्यों सब कुच्छ अब तक साफ नहीं हुआ है….क्यों वो लड़का हर केस से जुड़ा है….क्यों वो देव ना होते हुए भी खुद को देव कह रहा है….आख़िर क्या है जो बाकी है…चुत रहा है….
दोष~: क्या…?
मुन्ना~: अभी भी एक पॉवेरफ़ुल्ल अपराधी है जो इस केस का मुख्य आरोपी है…..जिसे देव खुद नहीं…..कानून सजा दिलाना चाहता है…वरना अब तक वो खुद सजा दे चुका होता….ऐसा नहीं है की वो उस तक. नहीं पहुँच सकता है….पहुँच सकता है….मगर पहुँचना नहीं बेनक़ाब करना चाहता है….समाज के सामने सारी कहानी लाना चाहता है.
दोष~: वेल्लडोने सिंग….सही जा रहे हो…जल्द ही उसका पता लगाओ.

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ढलती उमर में काला लोड्‍ा लिया

दोस्तों आज तक आप ने जीतने भी ब्लॉंड सेक्स स्टोरी देखे होंगे उसमें से अधिकतर में उन्हें काला लंड लेते हुए दिखाई गई होंगी. लेकिन असली जिंदगी में ऐसी बहुत सब ब्लॉनड्स है जिन्होंने ढलती उमर तक कभी काला लोड्‍ा लिया नहीं होता है. जॅसमिन भी एक ऐसी ही ब्लॉंड मिलफ है. जॅसमिन 42 साल की हो गई है लेकिन उसने कभी भी अपने भोंसड़े में काले लंड को आज तक नहीं लिया था.

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Antarvasna Hindi Sex Stories मकड़जाल 10

बॉन्ड~: अच्छा प्यारे…एक बात बताओ..हालाँकि मैं जनता हूँ की सारे खेल सूत्रधार तुम नहीं कोई और भी है…..मगर ?
देव~: मगर,,,?
बॉन्ड~: फिलहाल सिर्फ़ इतना बता दो की तुमने जज से ऐसा क्या कहा की उसने पहले छग्गा को मारा फिर खुद आत्म हत्या कर ली….?
देव~: मुझे क्या पता…?
बॉन्ड~: मुझे पता है…
देव~: फिर बताओ ना…
बॉन्ड~: जरूर बताएँगे प्यारे…अपना काम भी तो साला यही है…पर पहले मेरे सवालों के जवाब तो मिले.
देव~: अब क्या बाकी रहा….
बॉन्ड~: चलो शुरू से समझता हूँ….रोहित गुप्ता और उसके दोस्त ने मुक्ति का रेप किया……उस रेप में एक तीसरा और भी थी….पोस्टमारतें रिपोर्ट का यही कहना था…ठीक..?
देव चुप रहा.
बॉन्ड~: फिर जब भी.में.ठाकुर ने कानून की मदद ली…वो केस हारने ही वाले थे…तभी एक चमत्कार हुआ…ठाकुर साहेब को सबूत मिला…..नतीज़न उन लोगों ने पूरे परिवार का किडनॅप किया…..और उन्हें मर डाला….देव को चूँकि ठाकुर साहेब ने समझा बुझा कर, देव को वापस भेज दिया…देव वापस लौटता , उससे ही पहले ये सारा कांड हो गया…….मैं ठीक कह रहा हूँ ना…?
देव चुप रहा.
बॉन्ड~: साँप क्यों सूंघ गया प्यारे….कुच्छ तो कहो….आपकी आवाज़ कानों में रस घोलती है..
देव ~: जी..सच है.
बॉन्ड~: मजा आ गया प्यारे…मना पड़ेगा ..कमाल का दिमाग दिया है ऊपर वाले ने उसे…जिसने ये सारा खेल खेला है…पर ?
देव~: पर क्या ?
बॉन्ड~: ये तो थी इंटर्वल तक की कहानी…जब शुरू होती है देव के इंतक़ाम की कहानी….
देव को मना पड़ा..बॉन्ड का एक एक शब्द सच था….सारी कहानी ऐसे सुना रहा था जैसे आंखों देखा हाल सुना रहा हो…पर देव खामोश रहा.
बॉन्ड~: अब यहाँ एक सवाल उठता है…की अगर ठाकुर परिवार गायब होने की कोई जरूरत नहीं थी….जब उन्हें सबूत मिल गया था…
दूसरी बात ..अगर दुश्मनों ने उस सबूत के लिए ठाकुर साहेब का किडनॅप किया था…अगर वो सबूत दुश्मनों को मिल गया था तो पूरे परिवार को मरने की कोई जरूरत ही नहीं थी…इसका मतलब उन्हें वो सबूत नहीं मिला…ईयसलीए एक एक कर सबको मर दिया और शायद कही दफ़ना दिया…या जला दिया हो..
तीसरी बात…..देव ने अपनी और अपने परिवार की सारी आइडी लेकर खुद गायब क्यों हो गया…..अगर तुम देव हो तो जवाब दो….?
देव~: नहीं मिस्टर. बॉन्ड…ऐसा कुच्छ नहीं हुआ…सब मान घाड़ंत बातें है….!
बॉन्ड~: कोई बात नहीं प्यारे…मैं बता देता हूँ…
देव~: जरूर क्यों नहीं…
बॉन्ड~: तो सुनो प्यारे….देव ने पूरे घर को उसी सबूत के लिए खोजा…..वो सबूत उसके हाथ भी लग गया……सबूत देखते ही उसके अंदर का जादूगर जगह उठा……उसने सब की आइडी गायब की और रफूचक्कर हो गया और ये सारा खेल खेला….सही कह रहा हूँ ना…मिस्टर. नकली देव ?
देव~: अच्छी कहानी है बॉन्ड…..तुम्हें फिल्मों के लिए ट्राइ करना चाहिए…एक सुपरहिट फिल्म बन सकती है.
बॉन्ड~: वो प्यारे…सच काहु तो रिटाइयर्मेंट के बाद यही करने वाला हूँ.
देव सोचने लगा…कितना किया है ये…किसी भी बात का बुरा ही नहीं मानता है…..कुच्छ भी कह लो…बड़ा शातिर है ये बॉन्ड……!
पर सवाल फिर वही आ खड़ा होता है प्यारे….बॉन्ड बोला.
देव~: अब क्या सवाल रही गया….आपके पास हर सवाल का जवाब है…इसका भी जोगा.
बॉन्ड~: सवाल ये है प्यारे की इन सबमें तुम्हारा क्या रोल है….तुम क्या कर रहे हो….एक बार का खुलासा कर दम की मैं ये जान चुका हूँ की तुम्हारा चेहरा वास्तविक है…ना मास्क लगा है..ना ही कोई प्लास्टिक सर्जरी हुई है…..फिर इसका मतलब तुम देव नहीं हो…फिर कौन हो…और क्या कर रहे हो….?

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Antavasna Hindi Sex Stories मकड़जाल 9

अजीत~: ये मुझे नहीं पता…पर ये देव ठाकुर नहीं है…पक्का कह सकता हूँ.इसका खुद की कोई निजी वजह होगी.
प्रिया~: नहीं मिस्टर. अजीत….इसकी कोई निजी दुश्मनी नज़र नहीं आती…मैंने जितनी तहक़ीकात की है….एक ही बात खुलकर सामने आईहाई की इस देव का ठाकुर परिवार से गहरा रिश्ता है….इससे जुड़ी हर बात इसी केस की तरफ इशारा करती है…..एक बात बताओ…?
अजीत~: क्या ?
प्रिया~: आप किसी इंस्पेक्टर. मनिराम को जानते है..?
अजीत~: जी हाँ…यही इंस्पेक्टर. था जब ये हादसा हुआ था…बड़ा भ्रष्ट पुलिसवाला था…एक मोटी रकम ली थी इसने मुक्ति रेप केस को दबाने में…
प्रिया~: ये खुद आजकल पुलिस हिरासत में है…?
अजीत~: क्यों ?
प्रिया~: इसे देव ने ही बर्खास्त करवाया है और कानून के लपेटे में फँसाया है…!
अजीत~: क्या…
“हाँ….प्रिया ने सारी बात डीटेल्स के साथ बताई.
प्रिया~: क्या अब भी तुम यही कहोगे की इस देव की कोई पर्सनल दुश्मनी है..?
अजीत~: कुच्छ समझ में नहीं आ रहा है….आख़िर माज़रा क्या है….मेरा दिमाग घूम रहा है..
प्रिया~: किसी की समझ में नहीं आ रहा है….शायद ये जो भी है….ठाकुर परिवार के सारे राज़ फर्श होने पर ही सच सामने आएगा….ठाकुर केस की हर डीटेल्स खुलने के बाद ही पता चल पाएगा की आख़िर है कौन और सारा रायता क्यों फैला रहा है…सब कुच्छ जाने के लिए मुझे आपकी मदद चाहिए ?
अजीत~: मैं आपके साथ हूँ…बताइए मैं क्या कर सकता हूँ…?
प्रिया~: कुच्छ सवालों के जवाब चाहिए?
अजीत~: पूछिए…क्या पूछना है,,?
प्रिया~: देव ठाकुर कही बाहर पढ़ता था…मैं सुना है वो लॉ का स्टूडेंट था…?
अजीत~: सच है…देव एक ज़हीन दिमाग का मलिक था…इसीलिए ठाकुर परिवार उसे वकील बनाना चाहता था.
प्रिया~: क्या बता सकते हो..वो कोन से कालेज में पढ़ता था…?
अजीत~: ये तो नहीं पता…पर इतना पता है की वो यही मुंबई में ही पढ़ता था.
प्रिया~: क्या….?
अजीत ~: हाँ…!
प्रिया~: आपको कैसे पता….?
अजीत~: जब मुक्ति की मौत हुई तब देव आया था…..ठाकुर अंकल बार बार उसे मुंबई लौट जाने को कह रहे थे…
प्रिया~: आपकी कोई बात नहीं हुई…?
अजीत~: नहीं….उस वक्त पूरा परिवार गुम में डूबा था….मैं सिर्फ़ एक दिन रुका था…अगले दिन लौट आया….आते वक्त मैंने अपना कार्ड दिया था.
प्रिया~: देव कभी आया…?
अजीत~: नहीं…ना ही वो आया और ना ही उसकी कोई खबर मिली.
प्रिया~: उसकी कोई फोटो…कोई और बात..?
अजीत~: नहीं है…!
प्रिया~: कोई बात नहीं….उसका हुलिया ही बता दीजिए…!
अजीत ने जो हुलिया बताया…वो हज़ारों लोगों से मिलता जुलता था….!
प्रिया ने अजीत से ढेर सारे सवाल किए….अजीत सबके जवाब.देता रहा…..
देव की पहचान तो उजागर नहीं हुई पर ठाकुर केस के काफी सारे पहलू उजागर हो गये…..प्रिया वहाँ से विदा लेकर अपने ऑफिस पहुँची.
प्रिया ने सारी कहानी अब तक मिले सबूतों के आधार पर तैयार करके च्चपने का फैसला किया…उसने मुंबई….दिल्ली और रेवड़ी के अख़बार में एक साथ च्चपने का निश्चय किया…दिल्ली और रेवड़ी में भी ताजा खबर का ऑफिस था…सबको एक एक कॉपी भिजवा दी…एक एक कॉपी हर न्यूज चॅनेल को……!
अगली सुबह धमाके की सुबह थी….अब ठाकुर केस फाइल फिर रीयोपन होने वाली थी…प्रिया की उम्मीद से भी बड़ा धमाका होने वाला था….
सब धुरंधारो को क्या पता था की कोई उनसे सारा काम करवा रहा है…ये सारे किरदार तो बेचारे सोच रहे थे की वो सब कर रहे है….पर क्या यही सच था….या कोई मकड़जाल ???????
आज दिल्ली की सुहानी रात थी….शाम को हल्की हल्की हुई बारिश ने मौसम को खुशनुमा बना दिया था….रोशनी से नहाया शहर…और भीनी भीनी खुशबू भीखेरती हंडी हवा के झोंके आज की रात को यादगार बना रहे थे…
रात के अभी सिर्फ़ 8 बजे थे….देव अपने रूम पर लौटा….दरवाजे पर लगा लॉक खोला और अंदर घुसा तभी एक मर्दाना आवाज़ गूँज उठी…” वेलकम…देव प्यारे…वेलकम !
देव चौंका…घर बंद था….फिर ये अंदर कैसे घुसा..कौन है ये…इस तरह कैसे आया….घुसा भी तो किधर से….कई सवालों से देव घिर आया….जल्द ही खुद पर काबू पाया और बोला~: थेन्कस मिस्टर…
“बॉन्ड….कहते है मुझे…आज़माबी बोला और अपना हाथ आगे बढ़ा दिया.
देव ने हाथ मिलते हुए कहा~: बॉन्ड….?
बॉन्ड~: जी…बॉन्ड…इंडियन बॉन्ड…प्यार से लोग मुझे दीपक बॉन्ड कहते है….!
देव~: देव ठाकुर…प्यार से लोग देव ठाकुर ही कहते है.
दोनों धुरंधारो के चेहरे पर मुस्कान नाच रही थी.
देव~: आहो…भाग्य हमारे…जो बॉन्ड साहेब इस गरीब के घर पधारे…..बैठिए.
दोनों पास ही पड़ी कुर्सियो पर बैठ गये.
देव~: बॉन्ड सर…को तक़लीफ़ क्यों उतनी पड़ी…नाचीज़ को याद करते ..हाज़िर हो जाता…!
बॉन्ड मुस्कराया….समझ गया की लड़का पक्का खिलाड़ी है…..इससे कुच्छ उगलवाने में पसीना आएगा.
कहने को तो देव भी मुस्करा रहा था…पर अंदर ही अंदर कोई बात उसे परेशान कर रही थी…पर देव ने चेहरे से जाहिर नहीं होने दिया….बॉन्ड जैसा शातिर जब तक ताड़ पता..देव खुद पर काबू पा चुका था.
देव~: तो बॉन्ड साहेब..हमें आपका मिलने का तरीका पसंद आया…!
बॉन्ड~: पर हमें आपकी एक बात पसंद नहीं आई..प्यारे…!
देव~: वो क्या??
बॉन्ड~: भाई..सीधी सी बात है…हम बॉन्ड है तो खुद को बॉन्ड ही कहेंगे..मगर….?
देव~: मगर…?
बॉन्ड~: आप खुद को देव ठाकुर क्यों कह रहे है…हमारी समझ में नहीं आ रहा है…प्लीज़ समझाए हमें..प्लीज़.
बॉन्ड ने सचमुच हाथ जोड़ दिए.
देव चौकना हो गया…देव ने बॉन्ड को पहली नज़र में काफी हद तक पहचान लिया था पर इतना शातिर है समझ नहीं पाया था…पर उसकी बताओ ने साफ दर्शा दिया की उसको कुच्छ कहना..सोच समझ कर कहना…देव ने खुद पर काबू रखा.
देव~: फिर आप ही बता दीजिए ना की अगर मैं देव ठाकुर नहीं तो फिर कौन हूँ ?
देव के इस तरह खुले छल्लंगे से बॉन्ड भी हिल गया….वो समझ गया जितना उसने सोचा है लड़का उससे कई कदम आगे है.
देव~: आप मज़ाक अच्छा करते है..मुझे पसंद आया.
बॉन्ड~: कभी कभी हल्का फुलका छोड देते है प्यारे…..!
देव~: वैसे मिस्टर.बॉन्ड…आप करते क्या है….?
बॉन्ड~: समाज सेवा…!
देव~: वो कैसे…?
बॉन्ड~: च्चिपे हुए रहस्य को उजागर करना….लोग जिन्हें चमत्कार कहते है…उन चमत्कारो की पॉल खोलना समाज सेवा ही तो है प्यारे….सही कह रहा हूँ ना…?
“जी….देव इतना ही कह पाया…पर बॉन्ड के जवाब ने उसका सारा परिचय खुद भी खुद दे दिया…देव सतर्क हो गया.
देव~:यहाँ किस चमत्कार की पॉल खोलने आए है…महोदय ?
बॉन्ड~: कई साल पहले गायब हुआ साक्ष् एक नये चेहरे के साथ प्रकट होता है…खुद को वो जो बताता है….असल में वो है नहीं….क्या ये चमत्कार से कम है….अब जहाँ चमत्कार है …वहाँ हम है यानि..बॉन्ड ..दीपक बॉन्ड…!
इतना कहकर बॉन्ड ने अपनी गहरी नज़रे देव पर जमा दी…पर मजाल थी की देव के चेहरे पर कोई लकीर भी उभर जाए….देव बस मुस्कुराता रहा.
देव~: अच्छा काम है ..करते रहिए.
बॉन्ड~: पर कितने अफ़सोस की बात है की ऐसी अच्छे काम में भी लोग अपना सहयोग नहीं करते है….

बॉन्ड~; पर आप तो ऐसे नहीं है…है ना मिस्टर. गुमनाम ?
देव~: गुमनाम…?
बॉन्ड~: जी…जब आप देव है ही नहीं..जो की खुद को बताते है..फिर तो गुमनाम ही हुए ना..?
देव~: अगर ऐसा है तो साबित कीजिए..
देव ने सीधा छल्लंगे किया.
बॉन्ड~: आवास्या करेंगे भक्ता….बॉन्ड बाबा के दरबार से कोई निराश नहीं जाता….पहले रूम का पंखा और खिड़कियां बंद कीजिए….फिर करेंगे.
देव बॉन्ड की अजीब डीमाड से चकरा गया….देव अगर चाहता तो बॉन्ड के किसी भी सवाल देने से मना कर सकता था…पर बॉन्ड की बातों से समझ गया की ये आदमी सारा होमवर्क करके आया है….ये भी उसी केस की पड़ताल में जूता है जिस पर कई धुरंधर काम कर रहे है….बस सवाल एक समझना बाकी था की बॉन्ड किस डिपार्टमेंट है और कितना पहुँचा हुआ खिलाड़ी है…देव बस यही जाने के लिए बॉन्ड के सवालों का जवाब दे रहा था…
देव~: भला वो क्यों..
बॉन्ड~: क्या है ना प्यारे…मुझे अजीब सी बीमारी है….कभी कभी गर्मी के मौसम में भी ठंड लगने लगती है…जैसे की आज….बस थोड़ी देर में ठीक हो जाएगी….तब तक ज़रा मेहमान का कहना मानो…!
देव की समझ में सचमुच कुछ नहीं आया…सारी खिड़कियां और फन वगैरह बंद कर फिर अपनी जगह आ बैठा.
बॉन्ड~: एक बात तो माननी ही पड़ेगी…अच्छे मेजबान हो प्यारे.
देव~: थेन्कस मिस्टर. बॉन्ड.
बॉन्ड~: अब शुरू करते है…मॅजिक शो….आप अगर देव है तो अपनी आइडी दिखाए.
देव ने अपना ड्रॉयिंग लाइसेन्स दिखाया…
बॉन्ड गौर से ड्रॉयिंग लाइसेन्स देखता रहा.
देव~: असली ही है ना…?
बॉन्ड~: शुक्र है …आप की तरह आपका लीएसेंसे तो नहीं निकला.
देव~:वो कैसे…?
बॉन्ड~:सब बताएँगे प्यारे…ज़रा साँस तो लेने दो…?
रूम में उमस सी हो गयी….माथे पर पसीने की बूंदें झलक उठी….देव के माथे पर भी पसीना चालक आया.
बॉन्ड~: अब हम ठीक है प्यारे…फन चालू कर सकते हो…खिड़कियां खोल सकते हो…
देव~: अगर आपको फिर ठंड लगने लगी तो…?
बॉन्ड~: नहीं मेरे भोले बालम….हमें ये बीमारी दिन एक ही बार होती है….और आज की हो चुकी है…!
देव~: बड़ी अजीब बीमारी है….
बॉन्ड~: अब क्या करे प्यारे…है तो है.
देव ने फिर उमस से निजात पाने में लग गया…फिर वापस आकर बैठ गया.
बॉन्ड~: आप इसे जानते है….?
बॉन्ड ने एक तस्वीर पटकी….
देव~: जी..नहीं…!
बॉन्ड~: कमाल है…आप अपने पदोषी तक को नहीं जानते….!
देव~: होगा….कोई जरूरी तो नहीं की मैं सब पदोषियो को जनता हूँ ?
बॉन्ड~: कोई जरूरी नहीं प्यारे…पर ये महोदय आपको अच्छे से जानते है…इनका कहना है की ये आपसे कई बार मिल चुके है…
देव~: हो सकता है….मुझे याद नहीं.
बॉन्ड~: चलो कोई बात नहीं….पर इनका कहना है की जब आप अपने नये घर में शिफ्ट हुए थे तबसे लगातार ,लगभग राज मुलाकात होती थी….?
देव~: मगर मैं तो नये घर में कभी रहा ही नहीं…!
बॉन्ड~: फिर कहाँ रहे..?
देव~: अपने हॉस्टल में…
बॉन्ड~: कौनसा हॉस्टल..?
देव~:इतना कुच्छ बताया है …कुच्छ तो खुद पता कीजिए…आख़िर बॉन्ड है आप…दीपक बॉन्ड.
दोनों एक साथ मुस्करा उठे.
बॉन्ड~: वो भी पता कर लेंगे प्यारे…?
देव~: करना भी चाहिए…आख़िर बॉन्ड जो है आप.

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